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खून में पहुंच रहा प्लास्टिक! हार्ट अटैक मरीजों को लेकर स्टडी में बड़ा दावा

माइक्रोप्लास्टिक अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि इंसानी स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक नई स्टडी में सामने आया है कि हार्ट अटैक का सामना कर चुके 84 प्रतिशत मरीजों के खून में माइक्रो और नैनोप्लास्टिक के कण पाए गए। शोध में यह भी पता चला कि धूम्रपान और वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में इन कणों की मौजूदगी अधिक थी।

Vindhya Dubey20 जुल. 2026, 02:27 PM IST
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खून में पहुंच रहा प्लास्टिक! हार्ट अटैक मरीजों को लेकर स्टडी में बड़ा दावा

प्लास्टिक प्रदूषण का असर अब इंसानी शरीर तक पहुंचने लगा है। यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, हार्ट अटैक से प्रभावित ज्यादातर मरीजों के खून में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह साफ किया है कि माइक्रोप्लास्टिक सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बनता है, यह अभी साबित नहीं हुआ है।

इटली की सैपिएंजा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम, यूनिवर्सिटी ऑफ वेरोना और यूनिवर्सिटी ऑफ कैंपानिया "लुइजी वानविटेली" के शोधकर्ताओं ने 61 ऐसे मरीजों का अध्ययन किया, जिनकी कोरोनरी एंजियोग्राफी की जा रही थी। शोधकर्ताओं ने मरीजों की उन धमनियों से खून के नमूने लिए जो सीधे दिल तक रक्त पहुंचाती हैं। इसके साथ ही मरीजों के धूम्रपान इतिहास और लंबे समय तक पीएम 2.5 (PM2.5) वायु प्रदूषण के संपर्क का भी आकलन किया गया।

किन मरीजों में मिले ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक?

स्टडी के अनुसार:

  • हार्ट अटैक झेल चुके 84% मरीजों के कोरोनरी ब्लड में माइक्रो और नैनोप्लास्टिक मिले।
  • क्रॉनिक इस्केमिक हार्ट डिजीज वाले 40% मरीजों में ये कण पाए गए।
  • सामान्य कोरोनरी आर्टरी वाले 32% लोगों के खून में माइक्रोप्लास्टिक मिला।

शोध में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला प्लास्टिक पॉलीथिलीन (Polyethylene) था, जिसका इस्तेमाल खाद्य पैकेजिंग, प्लास्टिक बैग और कई उपभोक्ता उत्पादों में किया जाता है।

धूम्रपान और प्रदूषण से बढ़ा खतरा

शोधकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान करने वालों में खून में माइक्रोप्लास्टिक मिलने का खतरा करीब छह गुना ज्यादा था। अधिक पीएम 2.5 प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में भी इन कणों की मौजूदगी ज्यादा देखी गई।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

स्टडी के मुख्य लेखक डॉ. पास्क्वाले पाओलिसो ने कहा कि माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक अब लगभग हर जगह पाए जा रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि क्या ये छोटे कण दिल तक पहुंचने वाली रक्त वाहिकाओं में प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्टडी से यह साबित नहीं होता कि माइक्रोप्लास्टिक सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बनते हैं। यह केवल इनके बीच एक संबंध (association) दिखाती है।

माइक्रोप्लास्टिक शरीर को कैसे प्रभावित कर सकता है?

पहले की कई रिसर्च में माइक्रोप्लास्टिक के कण: खून, फेफड़ों, प्लेसेंटा (गर्भनाल), मां के दूध, धमनियों में जमा फैटी प्लाक तक पाए जा चुके हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये कण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं, सूजन (Inflammation) पैदा कर सकते हैं, रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

स्टडी में माइक्रोप्लास्टिक की ज्यादा मात्रा वाले मरीजों में सूजन से जुड़े मार्कर जैसे TNF-अल्फा और IL-6 भी अधिक पाए गए।

क्या प्लास्टिक से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है?

फिलहाल इस स्टडी से यह साबित नहीं हुआ है कि माइक्रोप्लास्टिक सीधे हार्ट अटैक कराता है। इसके लिए अभी और बड़े स्तर पर शोध की जरूरत है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान से बचना, वायु प्रदूषण से सुरक्षा, प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करना और ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल व डायबिटीज को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।


डिस्क्लेमर: इस अध्ययन में माइक्रोप्लास्टिक और हार्ट डिजीज के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन यह कारण और प्रभाव (cause-and-effect) साबित नहीं करता। इसकी पुष्टि के लिए आगे और शोध जरूरी है।