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"क्या अब टूटे या गिरे हुए दांत फिर से उगाना होगा संभव? वैज्ञानिकों की नई खोज ने जगाई उम्मीद"

दुनियाभर के वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जिनकी मदद से भविष्य में इंसानों के खोए हुए दांत दोबारा उगाए जा सकें। स्टेम सेल, जीन-आधारित उपचार और विशेष प्रोटीन को लक्षित करने वाली दवाओं पर हो रहे शोध से उम्मीद जगी है कि आने वाले वर्षों में दांतों के इम्प्लांट और नकली दांतों का विकल्प विकसित हो सकता है। हालांकि, यह तकनीक अभी शुरुआती शोध और क्लिनिकल परीक्षणों के चरण में है।

Kalpana Gautam20 जुल. 2026, 02:31 PM IST
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"क्या अब टूटे या गिरे हुए दांत फिर से उगाना होगा संभव? वैज्ञानिकों की नई खोज ने जगाई उम्मीद"
क्या भविष्य में टूटे या गिरे हुए दांत फिर से उग सकेंगे? जानिए वैज्ञानिकों की नई खोज
दांत केवल भोजन चबाने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि वे हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य, पाचन, स्पष्ट बोलने की क्षमता और चेहरे की बनावट को भी प्रभावित करते हैं। वर्तमान समय में यदि किसी व्यक्ति का दांत टूट जाता है या निकल जाता है, तो उसके लिए डेंटल इम्प्लांट, ब्रिज या डेंचर जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि ये समाधान प्रभावी तो हैं, लेकिन प्राकृतिक दांतों की तरह पूरी तरह काम नहीं करते और समय के साथ इनमें रखरखाव की भी आवश्यकता होती है। इसी चुनौती को देखते हुए दुनिया भर के वैज्ञानिक ऐसे उपचार विकसित करने में जुटे हैं जो इंसानों के नए, प्राकृतिक दांत उगाने में सक्षम हों। इस क्षेत्र को रिजनरेटिव डेंटिस्ट्री (Regenerative Dentistry) कहा जाता है, जिसमें शरीर की प्राकृतिक क्षमता का उपयोग करके नए दांत विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

किन तकनीकों पर हो रहा है शोध?
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस दिशा में तीन प्रमुख क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है—
स्टेम सेल तकनीक: वैज्ञानिक ऐसी कोशिकाओं का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं जो नए दांतों के ऊतकों का निर्माण कर सकें।
विशेष दवाएं: कुछ शोध ऐसे प्रोटीन को निष्क्रिय करने वाली दवाओं पर केंद्रित हैं जो सामान्यतः नए दांत बनने की प्रक्रिया को रोकते हैं। पशुओं पर किए गए प्रयोगों में ऐसे उपचार से अतिरिक्त दांत विकसित होने के उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।
बायोइंजीनियरिंग: वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में जीवित दांत जैसी संरचनाएं विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य में उन्हें मरीजों के जबड़े में प्रत्यारोपित किया जा सके।

जापान और अन्य देशों में हो रहे परीक्षण:
रिपोर्ट के अनुसार, जापान सहित कई देशों में इस दिशा में महत्वपूर्ण शोध चल रहा है। कुछ उपचारों के शुरुआती मानव क्लिनिकल परीक्षण भी शुरू हो चुके हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ये परीक्षण सफल रहते हैं, तो भविष्य में उन लोगों को सबसे अधिक लाभ मिल सकता है जिनके जन्म से कुछ दांत नहीं होते या किसी बीमारी अथवा दुर्घटना के कारण दांत खो गए हैं।

क्या जल्द उपलब्ध होगी यह तकनीक?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है। सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय तक क्लिनिकल परीक्षण और नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी। इसलिए फिलहाल डेंटल इम्प्लांट और अन्य पारंपरिक उपचार ही मुख्य विकल्प बने रहेंगे। हालांकि, अब तक के शोध परिणाम इस बात का संकेत देते हैं कि भविष्य में प्राकृतिक दांतों को दोबारा उगाना संभव हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह दंत चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे बड़े बदलावों में से एक साबित हो सकता है और करोड़ों लोगों को अधिक प्राकृतिक तथा टिकाऊ उपचार उपलब्ध करा सकता है।