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कैंसर के इलाज में नई उम्मीद! क्या मांसपेशियां बनाने वाला क्रिएटिन (Creatine) सप्लीमेंट बन सकता है इम्यूनोथेरेपी का नया हथियार?
जिम और बॉडीबिल्डिंग में लोकप्रिय क्रिएटिन (Creatine) सप्लीमेंट भविष्य में कैंसर के इलाज को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकता है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस (UCLA) के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में पाया गया है कि क्रिएटिन प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) की महत्वपूर्ण डेंड्रिटिक कोशिकाओं (Dendritic Cells) को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है। ये कोशिकाएं कैंसर से लड़ने वाली टी-कोशिकाओं (T Cells) को सक्रिय करती हैं। हालांकि, यह शोध अभी चूहों और प्रयोगशाला में मानव कोशिकाओं तक सीमित है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इसे कैंसर का इलाज या क्रिएटिन सप्लीमेंट लेने की सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
Kalpana Gautam20 जुल. 2026, 09:54 PM IST

जिम और बॉडीबिल्डिंग में लोकप्रिय क्रिएटिन (Creatine) सप्लीमेंट भविष्य में कैंसर के इलाज को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकता है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस (UCLA) के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में पाया गया है कि क्रिएटिन प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) की महत्वपूर्ण डेंड्रिटिक कोशिकाओं (Dendritic Cells) को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है। ये कोशिकाएं कैंसर से लड़ने वाली टी-कोशिकाओं (T Cells) को सक्रिय करती हैं। हालांकि, यह शोध अभी चूहों और प्रयोगशाला में मानव कोशिकाओं तक सीमित है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इसे कैंसर का इलाज या क्रिएटिन सप्लीमेंट लेने की सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
क्रिएटिन की नई भूमिका पर वैज्ञानिकों की नजर
अब तक क्रिएटिन को मुख्य रूप से मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने, व्यायाम के दौरान प्रदर्शन सुधारने और रिकवरी तेज करने वाले सप्लीमेंट के रूप में जाना जाता था। लेकिन iScience जर्नल में प्रकाशित इस नए अध्ययन से संकेत मिला है कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और यूसीएलए के प्रोफेसर डॉ. लिली यांग के अनुसार, क्रिएटिन केवल कैंसर से लड़ने वाली टी-कोशिकाओं को ही ऊर्जा नहीं देता, बल्कि उन डेंड्रिटिक कोशिकाओं को भी सक्रिय बनाता है जो पूरे प्रतिरक्षा तंत्र का संचालन करती हैं।
शोध में क्या पाया गया?
वैज्ञानिकों ने सबसे पहले चूहों की डेंड्रिटिक कोशिकाओं का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि ट्यूमर के भीतर मौजूद इन कोशिकाओं में क्रिएटिन ट्रांसपोर्टर (CrT) प्रोटीन सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक मात्रा में पाया गया। यही प्रोटीन कोशिकाओं के भीतर क्रिएटिन पहुंचाने का काम करता है। जब शोधकर्ताओं ने ऐसी डेंड्रिटिक कोशिकाएं तैयार कीं जिनमें CrT नहीं था, तो परिणाम चौंकाने वाले थे—
- ये कोशिकाएं कम सक्रिय रहीं।
- उनकी जीवित रहने की क्षमता घट गई।
- वे टी-कोशिकाओं को कैंसर के खिलाफ प्रभावी ढंग से सक्रिय नहीं कर सकीं।
- टी-कोशिकाओं की संख्या और उनकी कैंसर से लड़ने की क्षमता भी कम हो गई।
क्रिएटिन देने पर क्या हुआ असर?
इसके बाद वैज्ञानिकों ने डेंड्रिटिक कोशिकाओं को क्रिएटिन उपलब्ध कराया। इससे कोशिकाओं में ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) का स्तर बढ़ गया, जो शरीर की कोशिकाओं का मुख्य ऊर्जा स्रोत माना जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, क्रिएटिन ने इन कोशिकाओं को ठीक वैसे ही अतिरिक्त ऊर्जा दी जैसे किसी रीचार्जेबल बैटरी को चार्ज किया जाता है।
चूहों पर किए गए परीक्षण में रोजाना क्रिएटिन देने से—
- ट्यूमर की वृद्धि धीमी हुई।
- अधिक संख्या में सक्रिय डेंड्रिटिक कोशिकाएं ट्यूमर तक पहुंचीं।
- इन कोशिकाओं ने ऐसे रासायनिक संकेत छोड़े, जिनसे अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाएं भी ट्यूमर तक पहुंचकर हमला करने लगीं।
- मानव कोशिकाओं पर भी दिखा सकारात्मक प्रभाव
वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में मानव डेंड्रिटिक कोशिकाओं पर भी क्रिएटिन का परीक्षण किया।
परिणामों में पाया गया कि—
- डेंड्रिटिक कोशिकाएं अधिक सक्रिय हुईं।
- उन्होंने टी-कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ बेहतर तरीके से तैयार किया।
- जिन डेंड्रिटिक कोशिकाओं का उपयोग कैंसर वैक्सीन बनाने में किया जाता है, उनमें भी क्रिएटिन ने सकारात्मक प्रभाव दिखाया।
- इससे वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में क्रिएटिन बेहतर डेंड्रिटिक सेल आधारित कैंसर वैक्सीन विकसित करने में भी उपयोगी हो सकता है।
क्या इम्यूनोथेरेपी होगी ज्यादा असरदार?
वर्तमान में कैंसर इम्यूनोथेरेपी से केवल 20 से 40 प्रतिशत मरीजों को ही पर्याप्त लाभ मिलता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि भविष्य के मानव परीक्षण सफल रहते हैं, तो क्रिएटिन इम्यूनोथेरेपी की प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इसे मरीजों में सहायक सप्लीमेंट के रूप में या कैंसर वैक्सीन तैयार करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या अभी क्रिएटिन लेना शुरू कर देना चाहिए?
बिल्कुल नहीं। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह अध्ययन अभी शुरुआती चरण में है। इसके निष्कर्ष केवल चूहों और प्रयोगशाला में विकसित मानव कोशिकाओं पर आधारित हैं।
फिलहाल ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि सामान्य लोग या कैंसर मरीज स्वयं क्रिएटिन सप्लीमेंट लेकर कैंसर का इलाज कर सकते हैं या बीमारी से बच सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के क्रिएटिन सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
निष्कर्ष
यह अध्ययन कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक नई संभावना जरूर प्रस्तुत करता है, लेकिन इसे अभी किसी चमत्कारी इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यदि भविष्य में मानवों पर होने वाले क्लिनिकल ट्रायल सफल रहते हैं, तो क्रिएटिन कैंसर इम्यूनोथेरेपी और कैंसर वैक्सीन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फिलहाल वैज्ञानिक इसे एक उम्मीद भरी शोध मान रहे हैं, न कि स्थापित उपचार।
