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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर: बच्चों पर सबसे बड़ा खतरा, घंटों में जानलेवा बन सकता है संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर।
गुजरात में एक बार फिर चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के साबरकांठा और पंचमहल जिलों में बच्चों की मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। यह वायरस मुख्य रूप से 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी मस्तिष्क में सूजन का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी तेजी से बढ़ती है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
Kalpana Gautam20 जुल. 2026, 09:54 PM IST

गुजरात में एक बार फिर चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के साबरकांठा और पंचमहल जिलों में बच्चों की मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। यह वायरस मुख्य रूप से 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी मस्तिष्क में सूजन का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी तेजी से बढ़ती है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस (CHPV) एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक वायरस है, जिसकी पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। यह वायरस रेब्डोविरिडी (Rhabdoviridae) परिवार का सदस्य है और मुख्य रूप से सैंड फ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह वायरस इंसान से इंसान में फैलने के प्रमाण अब तक नहीं मिले हैं।
बच्चों के लिए क्यों है सबसे बड़ा खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण सबसे अधिक 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है। वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है और कुछ ही घंटों में स्थिति गंभीर हो सकती है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
गुजरात में क्या है मौजूदा स्थिति?
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात के साबरकांठा और पंचमहल जिलों में कई संदिग्ध और पुष्ट मामले सामने आए हैं। कुछ बच्चों की मौत के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर रखा है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित इलाकों में—
- घर-घर स्वास्थ्य जांच अभियान,
- संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग,
- सैंड फ्लाई नियंत्रण के लिए विशेष छिड़काव,
- अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश,
- लोगों में जागरूकता अभियानजैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
क्या हैं इसके प्रमुख लक्षण?
चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं, लेकिन यह तेजी से गंभीर रूप ले सकता है।
मुख्य लक्षणों में शामिल हैं—
- तेज बुखार
- बार-बार उल्टी
- दौरे (Seizures)
- बेहोशी या सुस्ती
- शरीर में ऐंठन
- मानसिक भ्रम
- अचानक स्थिति बिगड़ना
- विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
इलाज और बचाव
फिलहाल चांदीपुरा वायरस का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीजों का उपचार लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
बचाव के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं—
- बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं।
- घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
- सैंड फ्लाई के प्रजनन वाले स्थानों को खत्म करें।
- बच्चों को शाम और रात के समय कीटों के संपर्क से बचाएं।
- तेज बुखार या दौरे आने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें।
विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि चांदीपुरा वायरस में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर अस्पताल पहुंचने और उचित चिकित्सा मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए माता-पिता को बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर घरेलू उपचार के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि दुर्लभ संक्रमण भी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग सतर्क है, लेकिन संक्रमण को रोकने में आम लोगों की जागरूकता और समय पर इलाज सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
*Note* images used are AI illustrated.
