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दिल्ली में NC का प्रदर्शन, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई 2026 को नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने नई दिल्ली के संविधान क्लब के बाहर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में फारूक अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सांसदों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। पार्टी ने केंद्र सरकार से संसद के मौजूदा सत्र में राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। यह विरोध 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद दिए गए राज्य का दर्जा बहाल करने के आश्वासन को लेकर किया गया। NC का कहना है कि पूर्ण राज्य बनने से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय सरकार को अधिक अधिकार मिलेंगे।
Neha Sharma20 जुल. 2026, 09:54 PM IST

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। संविधान क्लब के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सांसदों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से संसद के मौजूदा सत्र में राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
इस विरोध की पृष्ठभूमि 5 अगस्त 2019 से जुड़ी है। उसी दिन केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35A के अधिकांश प्रावधानों को हटाने का फैसला किया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम (Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019) लागू कर तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया। उस समय केंद्र सरकार ने कहा था कि भविष्य में उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिया जाएगा। इसी आश्वासन को पूरा करने की मांग अब फिर से तेज हो गई है।
प्रदर्शन के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने कहा कि राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकार सीमित हो गए हैं। उनका तर्क है कि पूर्ण राज्य बनने से निर्वाचित सरकार को अधिक अधिकार मिलेंगे, स्थानीय प्रशासन मजबूत होगा और जनता के मुद्दों का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता से किए गए वादे को पूरा करने के लिए जरूरी है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों का मुद्दा है। उन्होंने केंद्र सरकार से संसद में जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी विधेयक लाने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने तख्तियां और बैनर लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखी तथा कहा कि जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं होता, तब तक उनका अभियान जारी रहेगा।
इस प्रदर्शन को संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की महत्वपूर्ण कोशिश माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर क्या फैसला लेती है और संसद में इस मुद्दे पर क्या चर्चा होती है।
