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ठाणे में होर्डिंग सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल, हादसों के बाद प्रशासन की कार्रवाई तेज

ठाणे में लगातार हो रहे होर्डिंग और बैनर हादसों के बाद शहर में विज्ञापन ढांचों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालिया दुर्घटनाओं के बाद ठाणे महानगरपालिका (TMC) ने अवैध होर्डिंग हटाने का अभियान तेज कर दिया है और सभी अधिकृत होर्डिंग का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, नागरिकों का सवाल है कि यदि सुरक्षा जांच और नियम पहले से लागू थे, तो हादसे कैसे हुए? अब शहर में होर्डिंग नीति, अनुमति प्रक्रिया और प्रशासन की जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है।

Priyanka Gaikwad20 जुल. 2026, 09:55 PM IST
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ठाणे में होर्डिंग सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल, हादसों के बाद प्रशासन की कार्रवाई तेज
ठाणे शहर में हाल के दिनों में होर्डिंग और बड़े विज्ञापन बैनरों से जुड़े लगातार हादसों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाचपाखाडी क्षेत्र में स्ट्रक्चरल ऑडिट में सुरक्षित घोषित किया गया एक बड़ा होर्डिंग अचानक गिर गया, जबकि तीन हाथ नाका क्षेत्र में एक अवैध बैनर तेज हवा के कारण सड़क पर आ गिरा। इन दोनों घटनाओं में बड़ी जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन नागरिक बाल-बाल बच गए। इन हादसों ने यह स्पष्ट कर दिया कि शहर में होर्डिंग सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां हैं।

घटनाओं के बाद ठाणे महानगरपालिका ने पूरे शहर में अवैध होर्डिंग और बैनर हटाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। प्रशासन ने सभी अधिकृत होर्डिंग मालिकों को अपने स्ट्रक्चर का तात्कालिक स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने, सुरक्षा प्रमाणपत्र जमा करने और मानसून के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। जिन होर्डिंगों की स्थिति संदिग्ध पाई जाएगी, उन्हें तत्काल हटाया जाएगा और संबंधित एजेंसियों तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ठाणे शहर में लगभग 243 अधिकृत होर्डिंग हैं। इसके बावजूद विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अवैध बैनर और बिना अनुमति लगाए गए विज्ञापन दिखाई देते हैं। कई मामलों में अनुमति से बड़े आकार के होर्डिंग लगाए जाने, पुराने लोहे के स्ट्रक्चर का समय पर रखरखाव नहीं होने और नियमित तकनीकी जांच नहीं किए जाने के आरोप सामने आए हैं। नियमों के अनुसार 20×30 फुट आकार तक की अनुमति होने के बावजूद कई स्थानों पर इससे बड़े विज्ञापन ढांचे लगाए जाने की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता, निष्पक्षता और समय-समय पर दोबारा जांच भी उतनी ही जरूरी है। कई पुराने लोहे के ढांचे वर्षों से उपयोग में हैं, जिनमें जंग लगने, बोल्ट ढीले होने और नींव कमजोर पड़ने जैसी तकनीकी समस्याएं समय के साथ बढ़ जाती हैं। यदि नियमित निरीक्षण नहीं किया जाए, तो तेज हवा और भारी बारिश के दौरान ऐसे ढांचे दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। मानसून के दौरान तेज हवाओं और लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने सभी विज्ञापन एजेंसियों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। साथ ही अवैध बैनर लगाने वालों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करने और दोषी एजेंसियों पर दंडात्मक कार्रवाई की भी बात कही गई है। महानगरपालिका ने संबंधित विभागों को शहरभर में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाने और जोखिम वाले सभी होर्डिंगों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि केवल हादसों के बाद कार्रवाई करने के बजाय नियमित निरीक्षण, पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया, स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा नियमों का ईमानदारी से पालन किया जाए और समय-समय पर सख्त जांच की जाए, तो भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकता है तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।