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मानसून में डेंगू का कहर रोकने की तैयारी, महाराष्ट्र के अस्पतालों में बढ़ाए गए इंतजाम

बारिश के मौसम की शुरुआत के साथ ही महाराष्ट्र समेत देशभर में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मानसून के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे संक्रमण फैलने की संभावना अधिक रहती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के National Centre for Vector Borne Diseases Control (NCVBDC) की ओर से राज्यों को वेक्टर जनित बीमारियों की निगरानी बढ़ाने, जांच सुविधाओं को मजबूत करने और रोकथाम अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

Vindhya Dubey20 जुल. 2026, 09:55 PM IST
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मानसून में डेंगू का कहर रोकने की तैयारी, महाराष्ट्र के अस्पतालों में बढ़ाए गए इंतजाम

महाराष्ट्र में मानसून के दौरान डेंगू के मामलों पर विशेष नजर रखी जा रही है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों ने संवेदनशील इलाकों में सर्विलांस बढ़ाया है। मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरी क्षेत्रों में जलभराव, निर्माण स्थलों पर जमा पानी और अधिक आबादी के कारण डेंगू फैलने का खतरा अधिक रहता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला स्तर पर बुखार सर्वे, मच्छरों के लार्वा की जांच और एंटी-लार्वा गतिविधियां चलाने पर जोर दिया जा रहा है। महाराष्ट्र में डेंगू के मामलों की निगरानी के लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग संक्रमित क्षेत्रों की पहचान कर वहां मच्छर नियंत्रण अभियान, फॉगिंग और जनजागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू नियंत्रण के लिए केवल फॉगिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि घरों, सोसायटियों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी जमा होने से रोकना सबसे जरूरी कदम है।


मानसून के दौरान डेंगू और मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अस्पतालों में बुखार वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, डेंगू संदिग्ध मरीजों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जा रही है। जिला अस्पतालों और बड़े चिकित्सा केंद्रों को गंभीर मरीजों के इलाज के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।


डेंगू की पहचान के लिए अस्पतालों और सरकारी लैब में जांच सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। शुरुआती दिनों में डेंगू की पहचान के लिए NS1 Antigen Test का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि संक्रमण के बाद के चरणों में IgM Antibody Test और अन्य जांचों की मदद ली जाती है। समय पर जांच होने से मरीज की स्थिति पर नजर रखना और गंभीर मामलों को नियंत्रित करना आसान होता है।

डेंगू के दौरान प्लेटलेट कम होने को लेकर मरीजों और परिवारों में चिंता रहती है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार हर डेंगू मरीज को प्लेटलेट चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती। प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन का निर्णय मरीज की स्थिति, ब्लीडिंग, प्लेटलेट काउंट और अन्य मेडिकल संकेतों को देखकर लिया जाता है। मानसून के दौरान ब्लड बैंकों में प्लेटलेट की उपलब्धता बनाए रखना स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम प्राथमिकता होती है।


स्वास्थ्य विभाग की ओर से ब्लड बैंकों और अस्पतालों को प्लेटलेट स्टॉक की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर सहायता मिल सके। बड़े अस्पतालों में प्लेटलेट उपलब्धता, ICU सुविधा और रेफरल सिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। डेंगू के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते, कमजोरी और उल्टी जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में पेट दर्द, लगातार उल्टी, खून आना या अत्यधिक कमजोरी जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


मानसून के दौरान डेंगू और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों को रोकने के लिए प्रशासन, अस्पतालों और आम लोगों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। मच्छरों के प्रजनन को रोकना, साफ-सफाई बनाए रखना और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।