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संजय राउत का PM मोदी को चैलेंज: टेलीप्रॉम्प्टर हटाकर 'वंदे मातरम्' सुनाएं
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए राष्ट्रवाद के मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने 'वंदे मातरम्' और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर सरकार पर तंज कसा। राउत के बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है।
Neha Sharma20 जुल. 2026, 09:57 PM IST

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर वे वास्तव में राष्ट्रवाद की बात करते हैं, तो टेलीप्रॉम्प्टर के बिना 'वंदे मातरम्' सुनाकर दिखाएं। राउत के इस बयान ने संसद सत्र के पहले ही दिन राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी।
क्या कहा संजय राउत ने?
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि सिर्फ राष्ट्रवाद की बातें करने से नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में भी दिखाना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार 'वंदे मातरम्' से जुड़े कानून को लेकर इतनी गंभीर है, तो देश के शीर्ष नेताओं को बिना किसी तकनीकी सहायता के पूरा 'वंदे मातरम्' सुनाने में सक्षम होना चाहिए।
किस विधेयक को लेकर छिड़ा विवाद?
राउत का यह बयान उस समय आया जब संसद में 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किए जाने की तैयारी थी। प्रस्तावित विधेयक में 'वंदे मातरम्' का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान शामिल है।
विपक्ष का कहना है कि देशभक्ति केवल कानून बनाने से साबित नहीं होती, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के सम्मान से भी जुड़ी होती है। वहीं सरकार का पक्ष है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान सुनिश्चित करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
सियासी बयानबाजी तेज
संजय राउत के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे अनावश्यक राजनीतिक टिप्पणी बताया, जबकि विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने इसे सरकार की राष्ट्रवाद की राजनीति पर सवाल उठाने वाला बयान बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ ऐसे तीखे राजनीतिक बयान भी सदन के भीतर और बाहर चर्चा का केंद्र बने रह सकते हैं।
संसद सत्र पर टिकी निगाहें
मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी है। ऐसे में संजय राउत का यह बयान संसद की शुरुआत में ही राजनीतिक माहौल को और गर्म करने वाला माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।
संजय राउत का बयान एक तीखा राजनीतिक हमला माना जा रहा है, जिसने संसद सत्र की शुरुआत में ही राष्ट्रवाद और राजनीतिक जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच और तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।
