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'चलो संसद' मार्च की गूंज, प्रदर्शन तेज

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल से उन्होंने समर्थकों से आंदोलन जारी रखने और "चलो संसद" मार्च में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होने की अपील की। वांगचुक ने कहा कि उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही वे अपना अनशन समाप्त करेंगे। वहीं, दिल्ली पुलिस ने संसद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

Neha Sharma20 जुल. 2026, 09:57 PM IST
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'चलो संसद' मार्च की गूंज, प्रदर्शन तेज
दिल्ली में सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पैरोकार सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन तेज हो गया है। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अस्पताल से भी उन्होंने अपने समर्थकों के नाम संदेश जारी कर आंदोलन जारी रखने की अपील की। इसके बाद बड़ी संख्या में समर्थक दिल्ली में "चलो संसद" मार्च के लिए जुटे और सरकार से उनकी मांगों पर कार्रवाई की मांग की। 

अस्पताल से जारी संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी आवाज, आने-जाने की आज़ादी और संवाद की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखा गया है। उन्होंने कहा कि वे अपना अनिश्चितकालीन अनशन तभी समाप्त करेंगे जब उनकी तीन प्रमुख शर्तों में से किसी एक पर सरकार या राजनीतिक नेतृत्व ठोस आश्वासन देगा। 

सोनम वांगचुक ने अपनी तीन शर्तें भी स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों की जिम्मेदारी स्वीकार करे, या सभी प्रमुख राजनीतिक दल संसद में इन मुद्दों को उठाने का सार्वजनिक आश्वासन दें, अथवा उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा दिया जाए, तभी वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। उन्होंने युवाओं से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। 

इस बीच दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संसद क्षेत्र के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज़ है। वहीं प्रशासन का कहना है कि सभी कदम कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए जा रहे हैं। 

वहीं, सोमवार को सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि उनकी तबीयत अब पहले से बेहतर है और उन्होंने अस्पताल से अस्थायी छुट्टी देने की मांग की ताकि वे स्वयं "चलो संसद" मार्च में शामिल हो सकें।