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केन-बेतवा परियोजना पर आदिवासियों का आंदोलन तेज

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में आदिवासी परिवारों और ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। प्रभावित लोगों का आरोप है कि उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला है। रविवार तड़के प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आंदोलन स्थल खाली कराया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने इसे उनकी आवाज़ दबाने की कार्रवाई बताया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा।

Neha Sharma20 जुल. 2026, 09:57 PM IST
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केन-बेतवा परियोजना पर आदिवासियों का आंदोलन तेज
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ आदिवासी परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों का विरोध पिछले कई दिनों से जारी था। प्रभावित परिवारों का कहना है कि परियोजना के कारण उन्हें अपनी जमीन और घर छोड़ने पड़ेंगे, जबकि उचित मुआवजा और पुनर्वास अब तक नहीं मिला है। इसी मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने जल सत्याग्रह, चिता आंदोलन और सांकेतिक फांसी सत्याग्रह जैसे अनोखे तरीके अपनाए। 

आंदोलन के दौरान कई प्रदर्शनकारी बाराना नदी के किनारे डटे रहे। कुछ लोगों ने भूख हड़ताल भी शुरू की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों को सुनने के बजाय आंदोलन खत्म कराने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि जब तक पुनर्वास और मुआवजे पर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक विरोध जारी रहेगा। 

रविवार तड़के जिला प्रशासन और पुलिस ने आंदोलन स्थल खाली कराया। प्रशासन का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ रहा था और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी थी, इसलिए सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया। भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया और अन्य प्रदर्शनकारियों को उनके गांव भेज दिया गया। 

हालांकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह कार्रवाई उनकी सहमति के बिना की गई और उनकी आवाज़ दबाने का प्रयास है। उनका कहना है कि आंदोलन भले ही स्थल से हट गया हो, लेकिन परियोजना के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा। प्रभावित परिवार निष्पक्ष सर्वे, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। 

केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन दूसरी ओर पर्यावरणविदों और आदिवासी संगठनों का कहना है कि इससे हजारों परिवार प्रभावित होंगे और जंगलों तथा वन्यजीवों, विशेषकर पन्ना टाइगर रिजर्व, पर भी असर पड़ सकता है।