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बीएमसी का दावा या छलावा: कागजों पर सुधरी सड़कें, जमीन पर गड्ढों का राज।
मुंबई में मानसून के दौरान सड़कों की बदहाली और गड्ढों की समस्या फिर से गंभीर रूप में सामने आई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने शहर की 2050 किलोमीटर लंबी सड़कों में से 1700 किलोमीटर सड़कों का कॉंक्रीटीकरण पूरा करने का दावा किया है और शेष कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि नवभारत टाइम्स की धरातली पड़ताल में कुर्ला ईस्ट, एलबीएस रोड, सीएसएमटी और फोर्ट जैसे व्यस्त और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सड़कों पर भारी गड्ढे दिखे। बीएमसी के पॉटहोल फिक्स पोर्टल के अनुसार 3,114 गड्ढों की शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से 3,018 गड्ढों को भरने का दावा बीएमसी ने किया है। गड्ढों की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
Anshuman Mishra21 जुल. 2026, 07:09 PM IST

मुंबई: मुंबई में हर साल मानसून की शुरुआत के साथ ही सड़कों पर गड्ढों की भरमार नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। बीएमसी प्रशासन का दावा है कि बारिश रुकने के 24 घंटे के भीतर गड्ढों को भर दिया जाता है, लेकिन धरातल की सच्चाई इन दावों से बिल्कुल विपरीत नजर आती है। मुंबई के विभिन्न इलाकों में की गई पड़ताल में बीएमसी के दावों की हवा निकलती दिखी है। कुर्ला ईस्ट रेलवे स्टेशन के बाहर और आसपास की सड़कों की स्थिति काफी चिंताजनक है। कुर्ला पूर्व स्टेशन मुंबई के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक माना जाता है, जहां से रोज लाखों यात्री गुजरते हैं। स्टेशन के बाहर पानी से भरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को काफी कठिनाई हो रही है। जलजमाव के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दोपहिया चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
इसी तरह मुलुंड से भांडुप के बीच सोनापुर जंक्शन तक लाल बहादुर शास्त्री (एलबीएस) मार्ग का बड़ा हिस्सा कंक्रीट में तब्दील किया गया था, लेकिन हल्की बारिश के बाद ही इस नव-निर्मित मार्ग पर गड्ढे, दरारें और उखड़े हुए पैच नजर आने लगे हैं। सीमेंट कंक्रीट की सड़क क्षतिग्रस्त होने पर उसकी मरम्मत के लिए कंक्रीट के बजाय डामर या रसायनों का पैचवर्क किया जा रहा है, जो जलभराव के कारण तुरंत उखड़ जाता है।
इसके अतिरिक्त शहर का मुकुट कहे जाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के बाहर बेस्ट बस डिपो के पास, बीएमसी मुख्यालय से दो मिनट की दूरी पर स्थित मुंबई जिमखाना के सामने तथा राज्य मानवाधिकार आयोग के कार्यालय के सामने भी बड़े गड्ढे देखे गए हैं।
बीएमसी के पॉटहोल फिक्स पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार:
1. इस मानसून में अब तक कुल 3,114 गड्ढों की शिकायतें दर्ज की गईं।
2. इनमें से बीएमसी ने 3,018 गड्ढों को भरने का दावा किया है।
3. लगभग 96 शिकायतों पर अभी काम होना बाकी है।
4. बीएमसी ने 1,062 शिकायतों को जांच के बाद खारिज करते हुए गलत पाया जाना बताया है।
5. सड़कों की मरम्मत और गड्ढे भरने के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें 26 वार्डों के लिए 78 करोड़ रुपये और पूर्वी-पश्चिमी एक्सप्रेस हाईवे के लिए पृथक फंड शामिल है।
बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर के अनुसार, शहर की 2050 किलोमीटर सड़कों में से लगभग 1700 किलोमीटर का कॉंक्रीटीकरण हो चुका है और बाकी काम मार्च 2027 तक पूरा करने की योजना है। उन्होंने बताया कि 24 घंटे सेवा जारी है और शिकायत मिलने पर बीएमसी की टीम मौके पर पहुंचकर गड्ढा भरने का प्रयास करती है।
विशेषज्ञों और सिविल इंजीनियरों के अनुसार सड़कों के खराब होने के मुख्य कारण हैं:
1. बारिश के समय हवा और जमीन में नमी बढ़ने से डामर की पकड़ कमजोर हो जाती है।
2. सड़कों के रखरखाव पर समय से ध्यान न देना और निर्माण के दौरान कंक्रीट या डामर की पर्याप्त मोटाई न रखना।
3. भारी यातायात का दबाव और मानसून व गर्मी के कारण तापमान में बदलाव होना, जिससे सड़कें फैलती और सिकुड़ती हैं।
4. तापमान परिवर्तन से सड़कों पर छोटी-छोटी दरारें पड़ जाती हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने पर वे बड़े गड्ढों का रूप ले लेती हैं।
यह मामला मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा सड़कों को गड्ढा-मुक्त बनाने के अभियान और उसकी वास्तविक प्रगति से जुड़ा है। बीएमसी ने मुंबई की सड़कों को टिकाऊ बनाने के लिए डामर की सड़कों को हटाकर कंक्रीट की सड़कें बनाने का एक विशाल प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके साथ ही हर मानसून में गड्ढों की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा जाता है। परंतु वास्तविक धरातल पर कंक्रीट की नई सड़कों पर भी दरारें आ रही हैं और मरम्मत का काम गुणवत्तापूर्ण नहीं हो पा रहा है।
यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?
1. जनसुरक्षा: सड़कों पर बने गड्ढे जानलेवा दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनते हैं, विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए।
2. आर्थिक नुकसान: उबड़-खाबड़ सड़कों के कारण वाहनों के कलपुर्जे जल्दी खराब होते हैं और ईंधन की खपत बढ़ जाती है।
3. सार्वजनिक धन का सदुपयोग: प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये से अधिक का बजट गड्ढे भरने पर खर्च होता है। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि करदाताओं के पैसे का सही उपयोग हो रहा है या नहीं।
4. दैनिक आवागमन में रुकावट: गड्ढों और जलभराव के कारण मुंबई में भारी ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा होती है, जिससे लाखों यात्रियों का समय बर्बाद होता है।
सड़कों के कॉंक्रीटीकरण और उचित मरम्मत के लाभ
1. दीर्घकालिक स्थायित्व: कंक्रीट की सड़कें डामर की तुलना में अधिक मजबूत होती हैं और लंबे समय तक बिना किसी बड़ी खराबी के चलती हैं।
2. गड्ढों से मुक्ति: सही तकनीक से बनी कंक्रीट सड़कों पर बारिश के मौसम में पानी जमा होने पर भी गड्ढे नहीं बनते।
3. सुचारू यातायात: सड़कों की स्थिति अच्छी होने से यातायात की गति सुचारू रहती है और ईंधन व समय की बचत होती है।
4. रखरखाव लागत में बचत: बार-बार पैचवर्क और डामरीकरण पर होने वाले करोड़ों रुपये के वार्षिक खर्च की स्थायी बचत होगी।
यदि आपको मुंबई में किसी सड़क पर गड्ढा दिखाई देता है, तो आप बीएमसी के निम्नलिखित माध्यमों से शिकायत दर्ज कर सकते हैं:
1. मोबाइल ऐप: MyBMC Pothole Fix या Pothole QuickFix ऐप
2. व्हाट्सएप चैटबॉट: 8999228999
3. हेल्पलाइन नंबर: 1916 (टोल-फ्री, 24 घंटे उपलब्ध)
4. ऑनलाइन पोर्टल: BMC Pothole Fix Portal
शिकायत दर्ज करते समय फोटो और भू-स्थान (जियो-लोकेशन) साझा करने पर एक शिकायत पंजीकरण संख्या मिलती है, जिससे शिकायत की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकता है।
