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साइबर ठगी के आर्थिक नेटवर्क का पर्दाफाश, नवी मुंबई पुलिस का बड़ा एक्शन
साइबर ठगी से उगाही गई रकम को विभिन्न बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजने वाले कथित 'म्यूल अकाउंट' नेटवर्क के खिलाफ नवी मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। शहर के अलग-अलग पुलिस थानों में एक ही दिन में आठ मामले दर्ज किए गए हैं। शुरुआती जांच में 45 लाख 55 हजार रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है।
Priyanka Gaikwad21 जुल. 2026, 07:09 PM IST
नवी मुंबई पुलिस ने साइबर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क पर बड़ा प्रहार करते हुए 'म्यूल अकाउंट' रैकेट के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है। साइबर ठगी से लोगों से ठगी गई रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए घुमाकर उसके असली स्रोत को छिपाने वाले इस नेटवर्क की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। इसी के आधार पर रबाले एमआईडीसी, कोपरखैरणे, एपीएमसी, सीबीडी बेलापुर और पनवेल पुलिस स्टेशनों में कुल आठ एफआईआर दर्ज की गई हैं।प्राथमिक जांच में अब तक करीब 45 लाख 55 हजार रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी ऐसे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं जो लालच, कमीशन या धोखे में आकर अपने खाते उपलब्ध करा देते हैं।
इन्हीं खातों को 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को कई चरणों में अलग-अलग खातों में भेजा जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसों के असली स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
रबाले एमआईडीसी पुलिस ने 8 लाख 35 हजार रुपये की संदिग्ध वित्तीय हेराफेरी के मामले में मेहुल गोयसराज गोरसिया और स्टार्ट-2 बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े बैंक खाते के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में किस तरह किया गया।
कोपरखैरणे पुलिस ने चार अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। इनमें एमएसएम फ्रेश हार्वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के खाते में लगभग 2.80 लाख रुपये, साजिद के खाते में 1.30 लाख रुपये, मोहम्मद शब्बीर के खाते में करीब 1.20 लाख रुपये तथा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के एक अन्य खाते में लगभग 3.87 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है। इन मामलों में खाताधारकों की भूमिका और पैसों के लेनदेन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल की जा रही है।
एपीएमसी पुलिस ने भी तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार, मुस्कान पाटवाकर के बैंक खाते में करीब 2 लाख रुपये, मोहम्मद फरीद फिरोज खान के खाते में लगभग 2.25 लाख रुपये तथा एक अन्य अज्ञात आरोपी के खाते में करीब 13 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं। इन सभी मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सीबीडी बेलापुर पुलिस ने भी मनीष सलाम नामक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि उसके आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते से करीब 3 लाख 87 हजार रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ। पुलिस को आशंका है कि नवंबर 2023 से जून 2024 के बीच यह खाता साइबर अपराधियों के लिए म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया गया। इसी तरह पनवेल शहर पुलिस ने मनाली सिद्धेश भोई के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान सामने आया कि यस बैंक के खाते से अगस्त 2025 के दौरान साइबर ठगी से जुड़े करीब 8 लाख 9 हजार रुपये के 11 अलग-अलग संदिग्ध लेनदेन किए गए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का अंतिम लाभार्थी कौन था और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साइबर अपराधी सोशल मीडिया, फर्जी नौकरी, निवेश, ऑनलाइन ट्रेडिंग, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट, बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने या अन्य ऑनलाइन ठगी के जरिए लोगों से रकम वसूलते हैं। इसके बाद उसी रकम को म्यूल अकाउंट के माध्यम से कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है, जिससे रकम का ट्रैक छिप जाए और जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके। जांच एजेंसियां अब संबंधित बैंक खातों, खाताधारकों, मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस, केवाईसी दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि खाताधारक जानबूझकर इस नेटवर्क का हिस्सा बने थे या उन्हें झांसा देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
नवी मुंबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग या ओटीपी उपलब्ध न कराएं। यदि कोई व्यक्ति बैंक खाते के बदले कमीशन या किराए का लालच देता है तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर इसकी सूचना दें। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।
