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केसरिया राशन कार्डधारकों के लिए बड़ी राहत: वार्षिक आय सीमा 2 लाख रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने
मुंबई। महाराष्ट्र में बढ़ती आबादी और महंगाई को देखते हुए महायुति सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राज्य में लाभार्थियों की संख्या मौजूदा 7.16 करोड़ से बढ़ाकर 8.88 करोड़ करने के साथ-साथ केसरिया राशन कार्डधारकों के लिए वार्षिक आय सीमा लगभग 2 लाख रुपये करने का प्रस्ताव राज्य सरकार के विचाराधीन है।
Priyanka Gaikwad21 जुल. 2026, 07:10 PM IST

जनसंख्या के अनुपात में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने की मांग
महाराष्ट्र में 1 फरवरी 2014 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू है। उस समय राज्य की आबादी लगभग 11 करोड़ थी, जो पिछले 13 वर्षों में बढ़कर करीब 14 करोड़ के आसपास पहुंच गई है। इसके बावजूद, सस्ते राशन का लाभ पाने वाले लाभार्थियों की संख्या अब भी पुराने मानकों के आधार पर ही बनी हुई है।
वर्तमान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के 54.32 प्रतिशत (4.69 करोड़) और शहरी क्षेत्रों के 45.34 प्रतिशत (2.30 करोड़) यानी कुल 7.16 करोड़ लोगों को रियायती दर पर राशन उपलब्ध कराया जाता है। बढ़ती आबादी को देखते हुए राज्य सरकार ने इस संख्या को 8.88 करोड़ तक बढ़ाने की मांग केंद्र सरकार से की है।
डांगे समिति की रिपोर्ट और नई सिफारिशें
राशन वितरण के मानकों को अद्यतन करने के लिए राशनिंग नियंत्रक एवं नागरिक आपूर्ति निदेशक चंद्रकांत डांगे की अध्यक्षता में एक विशेष अध्ययन समिति गठित की गई थी। समिति ने राज्य के भूख सूचकांक, संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के वेतन तथा प्रति व्यक्ति आय का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।
समिति ने शहरी क्षेत्रों के लिए 1.80 लाख रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1.20 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा की सिफारिश की है। हालांकि, प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए एक समान 2 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा निर्धारित करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जा सकता है।
प्राथमिकता परिवार (PHH) की आय सीमा में भी होगा संशोधन
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद राज्य सरकार ने प्राथमिकता परिवार (PHH) योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 44 हजार रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 59 हजार रुपये वार्षिक आय सीमा निर्धारित की थी। लेकिन महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए ये मानक अब पुराने पड़ चुके हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अब आय सीमा में संशोधन कर नए और अधिक व्यावहारिक मानदंड लागू करने की तैयारी कर रही है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ मिल सके।
