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हाथ से केसपेपर-डिस्चार्ज कार्ड लिखना बंद करें; NMC का मेडिकल कॉलेजों को HMIS लागू करने का आदेश

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के अनुरूप हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HMIS) तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब मरीजों की जानकारी, केसपेपर और डिस्चार्ज कार्ड को डिजिटल तरीके से मैनेज करना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

Priyanka Gaikwad21 जुल. 2026, 07:14 PM IST
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हाथ से केसपेपर-डिस्चार्ज कार्ड लिखना बंद करें; NMC का मेडिकल कॉलेजों को HMIS लागू करने का आदेश
मुंबई : देश की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में डिजिटल बदलाव को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। NMC ने सभी मेडिकल कॉलेजों और उनके अधीन आने वाले अस्पतालों में हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HMIS) लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले के बाद मरीजों के केसपेपर, डिस्चार्ज कार्ड और मेडिकल रिकॉर्ड को हाथ से लिखने की प्रक्रिया को कम किया जाएगा और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को बढ़ावा दिया जाएगा। HMIS प्रणाली के माध्यम से मरीजों का इलाज इतिहास, जांच रिपोर्ट और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में सुरक्षित रखी जा सकेगी।

NMC के अनुसार, देश के कुछ मेडिकल कॉलेजों में अभी तक HMIS पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। इसके कारण कई जगह डॉक्टरों को मरीजों की जानकारी अभी भी मैन्युअली दर्ज करनी पड़ रही है। आयोग ने ऐसे संस्थानों को जल्द से जल्द डिजिटल प्रणाली शुरू करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के मुताबिक, HMIS के माध्यम से उपलब्ध होने वाली जानकारी का उपयोग मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर निगरानी रखने, अस्पतालों की कार्यप्रणाली सुधारने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने, अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था को NMC से जोड़ने और मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।

NMC ने नियमों का पालन नहीं करने वाले मेडिकल कॉलेजों को तीन श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में वे संस्थान हैं जहां HMIS शुरू है, लेकिन उनकी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सही तरीके से उपलब्ध नहीं है। दूसरी श्रेणी में वे कॉलेज हैं जिन्होंने अभी तक HMIS लागू नहीं किया है। तीसरी श्रेणी में वे संस्थान शामिल हैं जिन्होंने हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) नंबर जमा नहीं किया है या गलत जानकारी दी है। NMC का कहना है कि डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली लागू होने से मरीजों के इलाज में पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और मरीजों को बेहतर एवं तेज स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।