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TB-Free India अभियान में गुजरात की बड़ी छलांग, टीबी नियंत्रण में देश में नंबर-1 बना राज्य
भारत में टीबी के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच गुजरात ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। राज्य को टीबी नियंत्रण के क्षेत्र में “सबसे अधिक सुधार करने वाले राज्यों” की श्रेणी में देश में पहला स्थान मिला है। टीबी के मामलों और बीमारी से होने वाली मौतों में आई उल्लेखनीय कमी के आधार पर गुजरात को यह सम्मान दिया गया है।

यह उपलब्धि केंद्र सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान और राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत किए जा रहे लगातार प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। राज्य में टीबी की जल्द पहचान, बेहतर जांच सुविधाओं, मरीजों की नियमित निगरानी और समय पर इलाज उपलब्ध कराने की रणनीति से बीमारी पर नियंत्रण पाने में मदद मिली है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में पिछले कुछ वर्षों में टीबी के बोझ में लगातार कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2015 के मुकाबले टीबी संक्रमण और इससे होने वाली मौतों में गिरावट आई है। सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक जांच और उपचार सुविधाओं को मजबूत किया है, जिससे मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।
बेहतर जांच और मरीजों की निगरानी से मिली सफलता
टीबी की पहचान में तेजी लाने के लिए गुजरात में आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। मरीजों की पहचान के बाद उन्हें तुरंत उपचार से जोड़ने, दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और इलाज पूरा होने तक निगरानी रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा, टीबी मरीजों को पोषण सहायता देने वाली योजनाओं और सामुदायिक भागीदारी अभियानों ने भी बीमारी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत किया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, टीबी नियंत्रण में सफलता के लिए केवल इलाज ही नहीं बल्कि जागरूकता और सामाजिक सहयोग भी जरूरी है।
टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती
केंद्र सरकार वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ कई स्तरों पर काम कर रही है। राज्यों में सक्रिय केस खोज अभियान, मुफ्त जांच और दवा वितरण, डिजिटल निगरानी प्रणाली और जनभागीदारी के जरिए टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रयास जारी हैं। गुजरात की यह उपलब्धि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और टीबी नियंत्रण रणनीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास देश में टीबी के मामलों को कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
