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ई-रिक्शा बदल रहे हैं भारत की सवारी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मिला नया इंजन।

डाउन टू अर्थ के विश्लेषण के अनुसार भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की सबसे तेज वृद्धि ई-रिक्शा क्षेत्र में हो रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और कई अन्य राज्यों में ई-रिक्शा अंतिम मील कनेक्टिविटी, रोजगार और प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि चार्जिंग अवसंरचना, बैटरी प्रबंधन और सुरक्षा मानकों जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ई-रिक्शा भारत की स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरे हैं।

Anshuman Mishra22 जुल. 2026, 02:45 PM IST
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ई-रिक्शा बदल रहे हैं भारत की सवारी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मिला नया इंजन।
भारत: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती लोकप्रियता की चर्चा अक्सर इलेक्ट्रिक कारों और दोपहिया वाहनों के संदर्भ में होती है, लेकिन एक नए विश्लेषण से पता चलता है कि देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की असली ताकत ई-रिक्शा हैं। कई राज्यों में ई-रिक्शा न केवल लाखों लोगों के लिए सस्ती और स्वच्छ परिवहन सेवा उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि रोजगार, अंतिम मील (Last Mile) कनेक्टिविटी और प्रदूषण नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 

डाउन टू अर्थ के विश्लेषण के अनुसार भारत के कई राज्यों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की सबसे तेज वृद्धि ई-रिक्शा क्षेत्र में देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, असम और झारखंड जैसे राज्यों में ई-रिक्शा सार्वजनिक परिवहन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। कम परिचालन लागत, आसान रखरखाव और बेहतर आय के कारण चालक तेजी से पारंपरिक रिक्शा और ऑटो से ई-रिक्शा की ओर बढ़ रहे हैं।

क्या हैं ई-रिक्शा?

ई-रिक्शा बैटरी से चलने वाले तीन पहिया वाहन हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक मोटर का उपयोग किया जाता है। ये पेट्रोल, डीजल या सीएनजी की बजाय बिजली से चलते हैं। इनका संचालन खर्च पारंपरिक ऑटो रिक्शा की तुलना में काफी कम होता है और ये स्थानीय स्तर पर प्रदूषण भी नहीं फैलाते। भारत में इनका उपयोग मुख्य रूप से छोटी दूरी की यात्रा और अंतिम मील कनेक्टिविटी के लिए किया जाता है। 

विशेषज्ञों के अनुसार ई-रिक्शा की सफलता के पीछे कई कारण हैं। इनकी खरीद लागत अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में कम है, ईंधन पर खर्च लगभग समाप्त हो जाता है, रखरखाव सस्ता पड़ता है और चालक प्रतिदिन अधिक बचत कर पाते हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार और रिहायशी इलाकों के बीच अंतिम मील की यात्रा के लिए यह सबसे सुविधाजनक विकल्प बन चुके हैं।

कौन से राज्य हैं सबसे आगे?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा ई-रिक्शा बाजार बनकर उभरा है। इसके अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, असम और झारखंड में भी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा सड़कों पर उतर चुके हैं। इन राज्यों में छोटे शहरों और कस्बों तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार मुख्य रूप से ई-रिक्शा के जरिए हुआ है। कई शहरों में सार्वजनिक परिवहन की कमी को भी ई-रिक्शा पूरा कर रहे हैं। 

ई-रिक्शा केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का आधार बन चुके हैं। कम निवेश में वाहन खरीदने की सुविधा और कम परिचालन लागत के कारण बड़ी संख्या में लोग स्वरोजगार से जुड़ रहे हैं। विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में यह रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरे हैं।

पर्यावरण को क्या फायदा?
ई-रिक्शा स्थानीय स्तर पर धुआं नहीं छोड़ते, जिससे शहरों में वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है। यदि इनकी बैटरियों की चार्जिंग स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से हो तो कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। यही कारण है कि केंद्र और कई राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही हैं। 

हालांकि ई-रिक्शा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कई चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं, बैटरी बदलने की लागत अधिक है, कई क्षेत्रों में अनियमित निर्माण और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता तथा पुरानी लेड-एसिड बैटरियों के निपटान की समस्या भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैटरी रीसाइक्लिंग और चार्जिंग नेटवर्क मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में पर्यावरणीय चुनौतियां बढ़ सकती हैं। 

सरकार की पहल
भारत सरकार ने FAME योजना सहित विभिन्न नीतियों के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया है। कई राज्यों ने ई-रिक्शा पंजीकरण, परमिट, टैक्स में छूट और चार्जिंग अवसंरचना विकसित करने के लिए अलग-अलग योजनाएं शुरू की हैं। हाल ही में दिल्ली ने नई ईवी नीति के तहत भविष्य में इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। 

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में तेजी से बढ़ना है तो केवल इलेक्ट्रिक कारों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। सबसे अधिक प्रभाव उन वाहनों के विद्युतीकरण से आएगा जो रोजाना लाखों यात्राएं करते हैं। इस दृष्टि से ई-रिक्शा भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्रांति की रीढ़ साबित हो रहे हैं।

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की चर्चा अक्सर महंगी इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित रहती है, जबकि वास्तविक बदलाव छोटे और सस्ते परिवहन साधनों के जरिए हो रहा है। ई-रिक्शा न केवल प्रदूषण कम कर रहे हैं बल्कि लाखों लोगों को रोजगार, सस्ती यात्रा और बेहतर सार्वजनिक परिवहन भी उपलब्ध करा रहे हैं। यदि चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी गुणवत्ता और रीसाइक्लिंग व्यवस्था को मजबूत किया जाए तो ई-रिक्शा भारत की हरित परिवहन नीति का सबसे सफल मॉडल बन सकते हैं।