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CJP के 'संसद चलो' मार्च के बाद बवाल: घायल छात्रा वेंटिलेटर पर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी

CJP के 'संसद चलो' आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई अब बड़ा विवाद बनती जा रही है। प्रदर्शन के दौरान घायल हुई 21 वर्षीय युवती की हालत गंभीर बनी हुई है। युवती को दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा है। घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमों के तहत कार्रवाई की गई।

Vindhya Dubey22 जुल. 2026, 02:48 PM IST
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CJP के 'संसद चलो' मार्च के बाद बवाल: घायल छात्रा वेंटिलेटर पर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी

प्रदर्शन के दौरान कैसे बिगड़े हालात

CJP की ओर से आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव बढ़ गया और स्थिति टकराव में बदल गई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया, जिसमें कई लोग घायल हुए। वहीं, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने लगी थी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

घायल युवती की हालत गंभीर

पुलिस कार्रवाई में घायल 21 वर्षीय युवती को गंभीर हालत में RML अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और उसे लगातार निगरानी में रखा गया है। अस्पताल में उसका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही है। घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने युवती की हालत को लेकर चिंता जताई है और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कठोर कार्रवाई की गई।

जंतर-मंतर पर दूसरे दिन भी जारी रहा धरना

घटना के बाद भी CJP का धरना जंतर-मंतर पर जारी रहा। बड़ी संख्या में छात्र और युवा प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने रातभर धरना जारी रखा और अपनी मांगों को दोहराया। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के कुछ प्रमुख स्टेशनों पर भी प्रतिबंध लगाए गए, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संसद और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।

एक अन्य प्रदर्शनकारी की आंख में चोट

प्रदर्शन के दौरान एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। उसकी आंख में चोट लगने का दावा किया गया है। CJP ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान कानून के अनुसार कदम उठाए गए। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी प्रतिबंधित हथियार या पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया।

एफआईआर दर्ज, पुलिस ने दिए कार्रवाई के संकेत

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा, सरकारी काम में बाधा और अन्य आरोपों को लेकर कई एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकने के लिए कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक विवाद भी बढ़ा

इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। वहीं, कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान घायल और हिरासत में लिए गए छात्रों को कानूनी सहायता देने की बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई से इनकार

पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल इस स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। फिलहाल CJP का आंदोलन जारी है और घायल युवती की स्वास्थ्य स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावों के बीच यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बन गया है।