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ITBP जवान की मां का हाथ कटने के मामले में बड़ा एक्शन, कानपुर कोर्ट ने 3 डॉक्टरों समेत 5 को किया तलब

ITBP जवान की मां का हाथ काटे जाने के चर्चित मामले में कानपुर की अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने मामले में तीन डॉक्टरों समेत पांच लोगों को तलब किया है। यह कार्रवाई इलाज में कथित लापरवाही, उपचार में देरी और मरीज की हालत बिगड़ने के आरोपों को लेकर की गई है। अब अदालत में संबंधित डॉक्टरों और अन्य आरोपियों से जवाब मांगा जाएगा।

Vindhya Dubey22 जुल. 2026, 02:58 PM IST
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ITBP जवान की मां का हाथ कटने के मामले में बड़ा एक्शन, कानपुर कोर्ट ने 3 डॉक्टरों समेत 5 को किया तलब

मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब ITBP जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा था। जवान ने आरोप लगाया था कि अस्पतालों में समय पर सही इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी मां के हाथ में संक्रमण फैल गया और आखिरकार हाथ काटना पड़ा।

इलाज में देरी से बिगड़ी स्थिति का आरोप

परिवार का आरोप है कि महिला को हाथ में गंभीर समस्या होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज शुरू करने में देरी हुई। उनका दावा है कि यदि समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा और सही उपचार मिलता तो हाथ काटने की नौबत नहीं आती। परिवार की शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए टीम गठित की थी। जांच में इलाज की प्रक्रिया, डॉक्टरों की भूमिका और अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी की समीक्षा की गई।

जांच में सामने आई लापरवाही की बात

जांच रिपोर्ट में दो निजी अस्पतालों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। आरोप लगाया गया कि मरीज के इलाज में देरी हुई और जरूरी चिकित्सा कदम समय पर नहीं उठाए गए। इसके बाद संबंधित अस्पतालों और डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने मामले से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि मरीज की स्थिति बिगड़ने के पीछे चिकित्सा लापरवाही कितनी जिम्मेदार थी।

अदालत ने पांच लोगों को किया तलब

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीन डॉक्टरों और दो अन्य लोगों को पेश होने के लिए तलब किया है। अदालत अब सभी पक्षों को सुनने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी।

कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे किस तरह की कार्रवाई की जाए।

कटा हुआ हाथ लेकर पहुंचा था जवान

यह घटना तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई थी, जब ITBP जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक बॉक्स में लेकर अधिकारियों के पास पहुंचा था। जवान ने अस्पतालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की थी। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया था। इसके बाद अस्पतालों की भूमिका और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू की गई।

चिकित्सा लापरवाही पर उठे सवाल

इस मामले ने निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज, आपात स्थिति में निर्णय लेने की प्रक्रिया और डॉक्टरों की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर संक्रमण या चोट के मामलों में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है और देरी से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। फिलहाल अदालत की कार्रवाई के बाद इस मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी। पीड़ित परिवार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि संबंधित डॉक्टरों और अस्पतालों को अब अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा।