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522 की जगह 95 अंक? NEET छात्र पहुंचा बॉम्बे हाईकोर्ट, NTA पर गंभीर सवाल।

महाराष्ट्र के बीड जिले के NEET-UG 2026 अभ्यर्थी सोहम गवते ने दावा किया है कि उसकी OMR शीट और आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार उसे 522 अंक मिलने चाहिए थे, लेकिन NTA के स्कोरकार्ड में केवल 95 अंक दर्ज किए गए। NTA से जवाब न मिलने पर उसने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला 23 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है और यह परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता तथा मूल्यांकन प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है।

Anshuman Mishra22 जुल. 2026, 02:59 PM IST
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522 की जगह 95 अंक? NEET छात्र पहुंचा बॉम्बे हाईकोर्ट, NTA पर गंभीर सवाल।
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के बीड जिले के एक NEET-UG 2026 अभ्यर्थी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ में याचिका दायर की है। छात्र का दावा है कि आधिकारिक उत्तर कुंजी (Answer Key) और अपनी OMR शीट के आधार पर उसके 522 अंक बनते हैं, लेकिन NTA द्वारा जारी स्कोरकार्ड में उसे केवल 95 अंक दिए गए। मामला अब न्यायालय की निगरानी में पहुंच गया है और इससे परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। 

बीड निवासी सोहम नितिन गवते ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि NEET-UG 2026 री-एग्जाम के परिणाम में गंभीर त्रुटि हुई है। छात्र के अनुसार उसने 21 जून को आयोजित पुनर्परीक्षा दी थी। NTA द्वारा 14 जुलाई को जारी OMR रिस्पॉन्स शीट और 16 जुलाई को जारी आधिकारिक उत्तर कुंजी का मिलान करने पर उसने पाया कि उसके 136 उत्तर सही और 12 उत्तर गलत हैं। NEET की मार्किंग स्कीम के अनुसार उसके 522 अंक बनने चाहिए थे, लेकिन जारी स्कोरकार्ड में केवल 95 अंक दर्ज हैं। 

छात्र ने कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया?
याचिका में कहा गया है कि छात्र ने 17 और 18 जुलाई को NTA को ई-मेल भेजकर उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच और परिणाम में सुधार की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उसने न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।  याचिका के अनुसार सोहम गवते ने कक्षा 10वीं में 94.6 प्रतिशत और 12वीं (विज्ञान) में 74.17 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। छात्र का कहना है कि उसकी तैयारी और OMR शीट दोनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि उसका वास्तविक स्कोर स्कोरकार्ड में दर्शाए गए अंकों से कहीं अधिक होना चाहिए। 

NEET-UG 2026 री-एग्जाम क्यों हुआ था?
NEET-UG 2026 की मूल परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद NTA ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई और 16 जुलाई को परिणाम घोषित किए। ऐसे में इस परीक्षा से जुड़ी किसी भी तकनीकी या मूल्यांकन संबंधी त्रुटि का प्रभाव हजारों छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। 

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार महाराष्ट्र के अन्य छात्रों ने भी परिणाम में कथित विसंगतियों की शिकायत की है। कुछ छात्रों ने दावा किया है कि उनकी OMR शीट और उत्तर कुंजी के आधार पर अनुमानित अंक स्कोरकार्ड में दर्ज अंकों से काफी अलग हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और NTA की ओर से सभी मामलों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया भी नहीं आई है। 

NTA की भूमिका और परीक्षा प्रक्रिया
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं जैसे NEET, JEE Main, CUET और UGC-NET का आयोजन करती है। NEET-UG भारत में MBBS, BDS, AYUSH और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। हर वर्ष लाखों छात्र इसमें शामिल होते हैं, इसलिए परिणामों की सटीकता और पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

यदि स्कोर में त्रुटि हो तो छात्र क्या कर सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी अभ्यर्थी को OMR शीट, उत्तर कुंजी या स्कोरकार्ड में विसंगति दिखाई देती है, तो सबसे पहले NTA के निर्धारित माध्यम से शिकायत दर्ज करनी चाहिए। यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं मिलता और पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध हों, तो छात्र न्यायालय का रुख भी कर सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय और संबंधित जांच के आधार पर ही होता है।

यह मामला केवल एक छात्र के अंकों का विवाद नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा प्रश्न भी है। यदि मूल्यांकन या स्कोर जारी करने की प्रक्रिया में तकनीकी त्रुटि सिद्ध होती है, तो इसका प्रभाव अन्य अभ्यर्थियों पर भी पड़ सकता है। वहीं यदि जांच में NTA का मूल्यांकन सही पाया जाता है, तो इससे परीक्षा प्रणाली पर विश्वास मजबूत होगा। इसलिए इस मामले का फैसला लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजर में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ 23 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करेगी। छात्र ने उत्तर पुस्तिका के सत्यापन और संशोधित स्कोरकार्ड जारी करने की मांग की है। फिलहाल NTA की ओर से इस विशेष आरोप पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और मामला न्यायिक विचाराधीन है। अदालत की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अंक विसंगति तकनीकी त्रुटि थी या मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई अन्य समस्या।