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89 लाख से सीधे 1 करोड़ रुपये हुआ मुआवजा: सरकारी डॉक्टर की मौत पर कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, ITR को बताया सबसे बड़ा सबूत
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले सरकारी डॉक्टर के परिवार को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए गए 89 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया। न्यायमूर्ति बिस्वरूप चौधरी की पीठ ने कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवजा तय करते समय मृतक की आय का सबसे विश्वसनीय आधार उसका आयकर रिटर्न (ITR) होता है। अदालत ने बीमा कंपनी की आपत्तियां भी खारिज कर दीं और कहा कि पीड़ित परिवार को परिस्थितियों के अनुरूप न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए।
Sonali22 जुल. 2026, 03:03 PM IST

वर्ष 2018 में एक दर्दनाक सड़क हादसे में पश्चिम बंगाल सरकार के एक डॉक्टर की मौत हो गई थी। डॉक्टर अपनी ड्यूटी के दौरान यात्रा कर रहे थे, तभी एक सड़क दुर्घटना में उनकी जान चली गई। उनके निधन के बाद पत्नी और अन्य आश्रितों ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवजे की मांग करते हुए दावा याचिका दायर की। ट्रिब्यूनल ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परिवार को करीब 89 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, परिवार का कहना था कि ट्रिब्यूनल ने डॉक्टर की वास्तविक आय का सही आकलन नहीं किया, क्योंकि उनके आयकर रिटर्न (ITR) में दर्ज आय को पूरी तरह आधार नहीं बनाया गया। दूसरी ओर, बीमा कंपनियों ने भी मुआवजे की राशि को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में अपील दाखिल की।
मामले की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति बिस्वरूप चौधरी की एकल पीठ के समक्ष हुई। 17 जुलाई 2026 को सुनाए गए फैसले में अदालत ने कहा कि यदि किसी मृतक का नियमित आयकर रिटर्न (ITR) उपलब्ध है और उसकी प्रामाणिकता पर कोई संदेह नहीं है, तो मोटर दुर्घटना मुआवजा तय करते समय वही उसकी आय का सबसे विश्वसनीय और प्रमाणिक आधार माना जाएगा। अदालत ने कहा कि केवल अनुमानित आय या अन्य दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक आय को कम करके नहीं आंका जा सकता।
हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद आयकर रिटर्न, सेवा अभिलेख, भविष्य की आय में वृद्धि (Future Prospects), आश्रितों की संख्या तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों का पुनर्मूल्यांकन किया। अदालत ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने मृतक की वास्तविक आय का पूरा लाभ नहीं दिया था। इसके बाद मुआवजे की राशि करीब 89 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई।
अदालत ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की आपत्तियों को खारिज करते हुए दोनों कंपनियों को 50-50 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। साथ ही, दावा याचिका दाखिल होने की तारीख से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने और पूरी राशि तीन महीने के भीतर जमा करने का आदेश भी दिया।
अपने फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम का उद्देश्य सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके आश्रितों को 'उचित और न्यायसंगत मुआवजा' दिलाना है। अदालत ने कहा कि जब आय का सबसे विश्वसनीय दस्तावेज आयकर रिटर्न उपलब्ध हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह फैसला भविष्य में मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में आय के निर्धारण और मुआवजे की गणना के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जाएगा।
