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ठाणे में Amazon डेटा सेंटर पर बढ़ा विवाद: पानी की खपत के आंकड़ों पर उठे सवाल।

ठाणे के बालकुम क्षेत्र में प्रस्तावित Amazon Web Services (AWS) Hyperscale Data Centre को लेकर स्थानीय नागरिकों ने पानी की खपत के आंकड़ों में कथित विसंगति (discrepancy) का मुद्दा उठाया है। नागरिकों का दावा है कि परियोजना के दस्तावेजों में पानी की आवश्यकता और वास्तविक अनुमान में अंतर है, जबकि AWS का कहना है कि डेटा सेंटर के लिए पीने के पानी का उपयोग बेहद सीमित होगा और अधिकांश कूलिंग व्यवस्था जल-संरक्षण आधारित तकनीक से होगी। इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं और मामला राज्य सरकार के संज्ञान में भी पहुंच चुका है।

Kalpana Gautam22 जुल. 2026, 05:44 PM IST
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ठाणे में Amazon डेटा सेंटर पर बढ़ा विवाद: पानी की खपत के आंकड़ों पर उठे सवाल।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बालकुम क्षेत्र में प्रस्तावित Amazon Web Services (AWS) Hyperscale Data Centre को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने परियोजना में पानी की खपत से जुड़े आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि सार्वजनिक दस्तावेजों में दी गई जानकारी और वास्तविक आवश्यकता के बीच अंतर दिखाई देता है। 

प्रदर्शन कर रहे नागरिकों का कहना है कि इतना बड़ा डेटा सेंटर क्षेत्र के जल संसाधनों, बिजली की मांग और पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। उनका आरोप है कि परियोजना पर पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा और पारदर्शिता नहीं बरती गई तथा सभी तथ्यों को स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखा गया। 

वहीं AWS ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परियोजना में पीने के पानी का उपयोग केवल कर्मचारियों की दैनिक जरूरतों के लिए लगभग 10,000 लीटर प्रतिदिन (0.01 MLD) होगा। कंपनी का दावा है कि सर्वर कूलिंग के लिए पीने के पानी का उपयोग नहीं किया जाएगा और परियोजना सभी आवश्यक सरकारी एवं पर्यावरणीय मंजूरियों के अनुरूप विकसित की जा रही है। इस बीच, ठाणे नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि परियोजना से संबंधित आपत्तियां राज्य सरकार को भेज दी गई हैं और अंतिम निर्णय राज्य स्तर पर लिया जाएगा। 

संक्षिप्त सारांश
ठाणे के बालकुम में प्रस्तावित Amazon AWS Hyperscale Data Centre को लेकर स्थानीय नागरिकों ने पानी की खपत और पर्यावरणीय प्रभाव पर सवाल उठाए हैं। AWS ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि पीने के पानी का उपयोग बेहद सीमित होगा और परियोजना सभी नियामकीय मंजूरियों के अनुरूप है। मामला अब राज्य सरकार के विचाराधीन है।