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छात्रों के भविष्य से खिलवाड़’, पेपर लीक मामले में राहुल गांधी ने PM मोदी को घेरा
राहुल गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए और किसी को सजा नहीं मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगने की मांग की।

22 जुलाई 2026। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश में लगातार सामने आ रहे कथित परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में करीब 152 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं और इन मामलों में अब तक कोई दोषसिद्धि नहीं हुई है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगने की मांग की। राहुल गांधी ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में लगभग हर महीने एक पेपर लीक होने का दावा सामने आता है। उनके अनुसार, इन घटनाओं से करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में बार-बार होने वाली अनियमितताओं ने देश की शिक्षा प्रणाली और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की समस्या केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी व्यापक समस्या बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्र कठिन मेहनत और लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षाओं में शामिल होते हैं, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले पेपर लीक होने की खबर सामने आने पर उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण छात्रों पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ रहा है।
'152 पेपर लीक और जीरो कन्विक्शन'
राहुल गांधी ने अपने बयान में दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में कम से कम 152 पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने इस संख्या को भी एक अनुमानित आंकड़ा बताया और कहा कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इन मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के मामले में सरकार की कार्रवाई प्रभावी नहीं रही है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यदि परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियां होती रहें और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो, तो इससे छात्रों का सरकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। हालांकि, 152 पेपर लीक और '0 convictions' का आंकड़ा राहुल गांधी द्वारा किया गया राजनीतिक दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े के रूप में नहीं प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई क्यों की जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे एक ऐसी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली चाहते हैं जो निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी के लिए समान हो। उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन और उनकी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सुने जाने की जरूरत पर जोर दिया।
NEET और परीक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
पेपर लीक का मुद्दा हाल के वर्षों में देश की राजनीति में प्रमुख विषय रहा है। विशेष रूप से NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बाद परीक्षा प्रक्रिया, पारदर्शिता और छात्रों की शिकायतों के समाधान को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पूरे मुद्दे पर छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगने की मांग की।
सरकार की जवाबदेही पर विपक्ष का जोर
राहुल गांधी के बयान के बाद एक बार फिर परीक्षा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्ष का कहना है कि पेपर लीक जैसे मामलों में केवल परीक्षा रद्द करना या दोबारा परीक्षा कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत सजा दिलाना भी जरूरी है।
वहीं, इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि परीक्षा प्रक्रिया को किस तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य पर किसी भी तरह का असर न पड़े।
आगे क्या होगा?
राहुल गांधी के आरोपों ने एक बार फिर केंद्र सरकार के सामने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और जवाबदेही का मुद्दा खड़ा कर दिया है। अब राजनीतिक और सार्वजनिक बहस इस बात पर केंद्रित हो सकती है कि पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाती है और कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है।
छात्रों के लिए यह मुद्दा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं में वर्षों की तैयारी, आर्थिक खर्च और करियर की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता का सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। यही वजह है कि राहुल गांधी द्वारा उठाया गया यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर भी प्रमुखता से उठ सकता है।
