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भारत-चीन संबंधों में सुधार की नई पहल, व्यापार असंतुलन और सीमा मुद्दे पर हुई अहम बातचीत
भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता, व्यापार असंतुलन, बाजार तक निष्पक्ष पहुंच और आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषय प्रमुख रहे। भारत ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पर शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है। साथ ही, भारत ने चीन के साथ व्यापार में संतुलन और भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर बाजार अवसर सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। माना जा रहा है कि यह वार्ता दोनों देशों के संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

22 जुलाई 2026। भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में जारी प्रयासों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। मनीला में हुई इस वार्ता में दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता, व्यापार असंतुलन, बाजार तक निष्पक्ष पहुंच और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े विषय प्रमुख रहे। भारत ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच सामान्य और स्थिर संबंधों के लिए सीमा पर शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है। जयशंकर ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों की बुनियादी शर्त के रूप में रेखांकित किया। यह रुख भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसके अनुसार सीमा पर तनाव और व्यापक आर्थिक एवं राजनयिक सहयोग को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
व्यापार के मोर्चे पर भारत ने चीन के साथ लंबे समय से चले आ रहे भारी व्यापार घाटे और बाजार पहुंच से जुड़ी चिंताओं को उठाया। भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में संतुलन और समान अवसर सुनिश्चित करना आवश्यक है। नई दिल्ली ने चीन से भारतीय कंपनियों और उत्पादों के लिए बेहतर तथा निष्पक्ष बाजार पहुंच की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपेक्षा जताई है।भारत की चिंता केवल व्यापार घाटे तक सीमित नहीं है। आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापारिक निर्भरता को लेकर भी दोनों देशों के बीच चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत चाहता है कि द्विपक्षीय आर्थिक संबंध ऐसे आधार पर आगे बढ़ें, जहां व्यापार दोनों देशों के लिए अधिक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी हो।
हाल के वर्षों में भारत और चीन के संबंधों पर सीमा विवाद का गहरा प्रभाव पड़ा है। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों में काफी गिरावट आई थी। हालांकि, पिछले कुछ समय में सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत के जरिए तनाव कम करने तथा संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिशें तेज हुई हैं। भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के संकेत के तौर पर सीमा व्यापार को दोबारा शुरू करने, सीधी उड़ानों की बहाली और वीजा प्रक्रियाओं में कुछ राहत जैसे कदम भी सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सीमा व्यापार को लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू करने की दिशा में भी प्रगति हुई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर सीमा व्यापार से जुड़ी कुछ व्यावहारिक अड़चनें अभी भी बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-चीन संबंधों में वास्तविक प्रगति के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों में समानांतर प्रगति जरूरी होगी—सीमा पर स्थायी शांति, व्यापारिक असंतुलन को कम करना और आर्थिक गतिविधियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना। भारत की मौजूदा रणनीति स्पष्ट रूप से यह संकेत देती है कि वह आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ सीमा पर स्थिरता और पारस्परिक विश्वास को भी समान महत्व देता है।
इस बैठक को दोनों देशों के बीच संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी दूर है और व्यापार घाटे जैसी आर्थिक चुनौतियां भी बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश बातचीत के जरिए इन मुद्दों पर कितनी ठोस प्रगति कर पाते हैं। फिलहाल, जयशंकर और वांग यी की बैठक से यह संकेत जरूर मिला है कि भारत-चीन संबंधों में संवाद का रास्ता खुला हुआ है, लेकिन सामान्य संबंधों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सीमा और व्यापार दोनों मोर्चों पर ठोस परिणाम हासिल करना आवश्यक होगा।
