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रूस में 12 हजार फीट की ऊंचाई से गूंजा विठ्ठल का जयघोष; कल्याण के अजीत कारभारी ने दी वारकरी परंपरा को अनोखी वैश्विक पहचान

आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर महाराष्ट्र की वारकरी परंपरा को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने वाला एक प्रेरणादायक अभियान रूस में संपन्न हुआ। कल्याण के पैराजंपर और स्काईडाइवर अजीत कारभारी ने करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई से स्काईडाइव करते हुए भगवान विठ्ठल की प्रतिमा के साथ "राम कृष्ण हरी" का जयघोष किया। साहसिक खेल और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के इस अनूठे संगम की हर ओर चर्चा हो रही है।

Priyanka Gaikwad22 जुल. 2026, 07:04 PM IST
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रूस में 12 हजार फीट की ऊंचाई से गूंजा विठ्ठल का जयघोष; कल्याण के अजीत कारभारी ने दी वारकरी परंपरा को अनोखी वैश्विक पहचान
आषाढ़ी एकादशी महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस पावन अवसर पर कल्याण के पैराजंपर और स्काईडाइवर अजीत बळीराम कारभारी ने रूस में लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई से स्काईडाइव कर भगवान विठ्ठल को अनोखी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस साहसिक अभियान के माध्यम से उन्होंने महाराष्ट्र की वारकरी परंपरा, भक्ति और भारतीय संस्कृति का संदेश दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया। स्काईडाइव के दौरान अजीत कारभारी ने भगवान विठ्ठल की प्रतिमा अपने हाथों में लेकर विमान से छलांग लगाई। सुरक्षित लैंडिंग के बाद उन्होंने "राम कृष्ण हरी" और "श्री विठ्ठल" का जयघोष करते हुए भगवान विठ्ठल की प्रतिमा को नमन किया। इस अनोखे पल के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनकी लोग सराहना कर रहे हैं।

अजीत कारभारी ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल साहसिक खेल का प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि समाज में भक्ति, सकारात्मक सोच, भारतीय संस्कृति और वारकरी संप्रदाय का संदेश फैलाना था। उन्होंने कहा कि भारत, महाराष्ट्र और दुनिया भर के लोगों को भक्ति से जीवन में आनंद, ऊर्जा और मानसिक शक्ति प्राप्त हो, यही इस अभियान का मूल उद्देश्य है। साथ ही साहसिक खेलों का उपयोग देशसेवा, युवाओं को प्रेरित करने और समाज कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। इस अभियान को सफल बनाने के लिए अजीत कारभारी ने रूस के अनुभवी प्रशिक्षकों से विशेष स्काईडाइविंग प्रशिक्षण प्राप्त किया था। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इस स्काईडाइव को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

अजीत कारभारी इससे पहले भी अपने साहसिक अभियानों के कारण चर्चा में रह चुके हैं। उन्होंने रूस में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के साथ भी ऊंचाई से स्काईडाइव कर उन्हें अनोखी श्रद्धांजलि दी थी। अब भगवान विठ्ठल की प्रतिमा के साथ किया गया यह अभियान महाराष्ट्र की आध्यात्मिक विरासत और वारकरी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। साहसिक खेल और अध्यात्म का यह अनूठा संगम न केवल महाराष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आधुनिक खेलों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, भक्ति और सकारात्मकता का संदेश विश्वभर में प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।