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राम-सीता टिप्पणी विवाद: वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुई FIR, हाई कोर्ट बोला- शब्द अनुचित हो सकते हैं, लेकिन मंशा भी देखनी होगी

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों के बीच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। भगवान राम और माता सीता पर कथित टिप्पणी के मामले में कोर्ट ने कार्यक्रम संचालक संदीप कुमार को अग्रिम जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी भाषण या कविता का आकलन उसके पूरे संदर्भ में किया जाना चाहिए, न कि केवल कुछ अलग-थलग शब्दों के आधार पर वक्ता की मंशा तय की जा सकती है।

Sonali22 जुल. 2026, 07:28 PM IST
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राम-सीता टिप्पणी विवाद: वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुई FIR, हाई कोर्ट बोला- शब्द अनुचित हो सकते हैं, लेकिन मंशा भी देखनी होगी
राम और सीता पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज एफआईआर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कार्यक्रम संचालक संदीप कुमार को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है। कोर्ट ने कहा कि किसी कविता, दोहे या भाषण का आकलन उसके पूरे संदर्भ में किया जाना चाहिए। केवल कुछ शब्दों को अलग करके वक्ता की मंशा तय नहीं की जा सकती। अदालत ने माना कि इस मामले में शब्दों का चयन भले ही उचित न रहा हो, लेकिन प्रथम दृष्टया ऐसा नहीं लगता कि आरोपी का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को आहत करना, समाज में वैमनस्य फैलाना या कानून-व्यवस्था बिगाड़ना था।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का है। कार्यक्रम में संदीप कुमार मंच संचालन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने माता सीता के हरण के बाद लंका की महिलाओं के बीच हुई कथित बातचीत का उल्लेख करते हुए एक दोहा सुनाया। कार्यक्रम के दौरान बोले गए कुछ शब्दों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद कुछ संगठनों ने इसे भगवान राम और माता सीता का अपमान बताते हुए विरोध दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने संदीप कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) सहित धार्मिक आधार पर वैमनस्य फैलाने से जुड़े प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

हाई कोर्ट क्यों पहुंचे संदीप कुमार?
एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए संदीप कुमार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की।
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि वीडियो को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया गया है। याचिकाकर्ता स्वयं भगवान राम या माता सीता के बारे में टिप्पणी नहीं कर रहे थे, बल्कि लंका की महिलाओं के बीच हुई बातचीत का वर्णन कर रहे थे। कथित विवादित शब्द उनके व्यक्तिगत विचार नहीं बल्कि कथा का हिस्सा थे।

कोर्ट ने कब सुनाया फैसला?
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने 16 जुलाई 2026 को संदीप कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश पारित किया। यह आदेश "Sandeep Kumar v. State of Madhya Pradesh (MCRC No. 29490 of 2026)" में दिया गया। फैसले की जानकारी 21 जुलाई 2026 को प्रमुख मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुई।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध वीडियो देखने से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता लंका की महिलाओं के बीच हुई बातचीत का वर्णन कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि शब्दों का चयन भले ही उचित न रहा हो, लेकिन इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी का उद्देश्य लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, दंगा कराना या धार्मिक आधार पर वैमनस्य फैलाना था।
अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी भाषण या कविता की व्याख्या उसके पूरे संदर्भ में की जानी चाहिए। केवल कुछ शब्दों को अलग करके वक्ता की मंशा निर्धारित नहीं की जा सकती।

क्या आरोपी बरी हो गया?
नहीं।
हाई कोर्ट ने केवल गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देते हुए अग्रिम जमानत दी है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को आरोपों से बरी कर दिया गया है। पुलिस की जांच जारी रहेगी और मामले का अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर होगा।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में "इरादा (Intent)" और "संदर्भ (Context)" के महत्व को रेखांकित करता है। अदालत ने संकेत दिया कि केवल कुछ शब्दों के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम और वक्ता की मंशा को देखकर ही यह तय किया जाना चाहिए कि धार्मिक वैमनस्य या सार्वजनिक अशांति फैलाने का अपराध बनता है या नहीं।