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PLI योजना से बदली भारत की मैन्युफैक्चरिंग तस्वीर, ₹2.40 लाख करोड़ का निवेश

केंद्र सरकार के मुताबिक, PLI योजनाओं के तहत 31 मार्च 2026 तक ₹2.40 लाख करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है। इन योजनाओं से 14.15 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए, जबकि ₹15.2 लाख करोड़ से अधिक का निर्यात दर्ज किया गया। सरकार का कहना है कि PLI योजना भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और वैश्विक सप्लाई चेन में देश की भूमिका को मजबूत करने में अहम योगदान दे रही है।

Neha Sharma22 जुल. 2026, 07:31 PM IST
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PLI योजना से बदली भारत की मैन्युफैक्चरिंग तस्वीर, ₹2.40 लाख करोड़ का निवेश

नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। केंद्र सरकार की Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार के मुताबिक, 14 प्रमुख क्षेत्रों में लागू PLI योजनाओं के तहत 31 मार्च 2026 तक ₹2.40 लाख करोड़ से अधिक का वास्तविक निवेश हुआ है। इन योजनाओं के जरिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 14.15 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की जानकारी सरकार ने दी है। इसके अलावा, PLI योजनाओं के तहत अब तक ₹15.2 लाख करोड़ से अधिक का निर्यात दर्ज किया गया है।


14 प्रमुख क्षेत्रों में लागू है PLI योजना

सरकार ने देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने, निर्यात को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से 14 प्रमुख क्षेत्रों में PLI योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के लिए कुल ₹1.91 लाख करोड़ का स्वीकृत वित्तीय परिव्यय रखा गया है।

PLI योजना का उद्देश्य कंपनियों को भारत में अतिरिक्त उत्पादन और बिक्री बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा।


₹2.40 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक PLI योजनाओं के तहत ₹2.40 लाख करोड़ से अधिक का वास्तविक निवेश हुआ। इस निवेश के साथ इन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को विस्तार देने पर जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार, इन योजनाओं से अब तक ₹22.66 लाख करोड़ से अधिक का उत्पादन और बिक्री दर्ज की गई है। वहीं, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार को मिलाकर 14.15 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।


निर्यात में भी बड़ा इजाफा

PLI योजनाओं का एक प्रमुख लक्ष्य भारत के निर्यात को बढ़ाना भी है। सरकार के मुताबिक, इन योजनाओं के तहत अब तक ₹15.2 लाख करोड़ से अधिक का निर्यात हुआ है। सरकार का कहना है कि यह भारत के वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है।

इस योजना के जरिए सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करने और भारत को एक मजबूत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।


मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़ा बदलाव

PLI योजना का असर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र में भी देखने को मिला है। सरकार के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद देश में मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 2.4 गुना बढ़ा है। वहीं, मोबाइल फोन के आयात में लगभग 77 फीसदी की कमी आई है और भारत में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2 फीसदी मोबाइल फोन अब देश में ही निर्मित किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में हुई यह प्रगति भारत को वैश्विक मोबाइल फोन निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने में मदद कर रही है।


फार्मा और मेडिकल सेक्टर को भी फायदा

PLI योजना के तहत फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। सरकार के मुताबिक, इस क्षेत्र में योजना के तहत ₹3.64 लाख करोड़ से अधिक की संचयी बिक्री दर्ज हुई है। साथ ही, 1,931 फार्मास्यूटिकल उत्पादों का घरेलू स्तर पर निर्माण शुरू हुआ है, जिसमें 191 ऐसे बल्क ड्रग्स शामिल हैं जिनका उत्पादन भारत में पहली बार हुआ। बल्क ड्रग्स क्षेत्र में 26 महत्वपूर्ण Active Pharmaceutical Ingredients (APIs) के लिए करीब 55,000 मीट्रिक टन की विनिर्माण क्षमता भी स्थापित की गई है। सरकार के अनुसार, इससे कुछ महत्वपूर्ण दवाओं के लिए आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।


टेक्सटाइल सेक्टर में भी निवेश और रोजगार

टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए लागू PLI योजना के तहत 170 कंपनियों को मंजूरी दी गई है। सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक इन कंपनियों ने ₹8,117.64 करोड़ का निवेश किया और 33,427 नए रोजगार पैदा हुए। टेक्सटाइल PLI योजना का उद्देश्य भारत के मैन-मेड फाइबर (MMF) अपैरल, MMF फैब्रिक्स और टेक्निकल टेक्सटाइल उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है, ताकि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उत्पादन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता विकसित की जा सके।


किन क्षेत्रों को मिल रहा है PLI का लाभ?

PLI योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, IT हार्डवेयर, फार्मास्यूटिकल्स, बल्क ड्रग्स, मेडिकल डिवाइसेज, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी, सोलर PV मॉड्यूल, टेलीकॉम और नेटवर्किंग उत्पाद, फूड प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, स्पेशलिटी स्टील, व्हाइट गुड्स और ड्रोन एवं ड्रोन कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों को रणनीतिक महत्व वाला माना जाता है क्योंकि इनके जरिए भारत घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।


सरकार के लिए क्यों अहम है PLI?

PLI योजना केंद्र सरकार की 'Make in India' और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक उत्पादन और सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, निवेश, उत्पादन, रोजगार और निर्यात के स्तर पर PLI योजनाओं का विस्तार हुआ है। हालांकि, योजना की दीर्घकालिक सफलता का आकलन इस बात से होगा कि ये निवेश कितने स्थायी रोजगार पैदा करते हैं, घरेलू वैल्यू एडिशन कितना बढ़ता है और भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में कितनी मजबूत स्थिति हासिल कर पाता है। फिलहाल, सरकार के ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि PLI योजना भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को गति देने की दिशा में एक प्रमुख नीति पहल बनकर उभरी है।