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मेनोपॉज से पहले शरीर में ये बदलाव दे सकते हैं दिल की बीमारी का संकेत, जानें डॉक्टरों की सलाह।
महिलाओं के जीवन में पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) एक ऐसा दौर होता है, जब शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की ओर बढ़ता है। इस दौरान हार्मोन में बदलाव के कारण कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियां सामने आ सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र में सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षणों को केवल हार्मोनल बदलाव समझना सही नहीं है। कई बार ये हृदय से जुड़ी गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं।

पेरिमेनोपॉज आमतौर पर 40 साल के आसपास शुरू हो सकता है, हालांकि इसकी शुरुआत हर महिला में अलग-अलग समय पर होती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होने लगता है, जिसका असर महिलाओं की हड्डियों, मूड, नींद और हृदय स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
हार्मोनल बदलाव और दिल की सेहत का संबंध
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। पेरिमेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं। इस दौरान खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ सकता है, ब्लड प्रेशर में बदलाव आ सकते हैं और वजन बढ़ने की संभावना भी बढ़ सकती है। ये सभी कारण आगे चलकर हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज का खतरा पहले की तुलना में बढ़ जाता है, इसलिए पेरिमेनोपॉज के दौरान ही हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।
सीने में दर्द को सामान्य समझने की गलती न करें
कई महिलाएं पेरिमेनोपॉज के दौरान होने वाली थकान, बेचैनी या सीने की परेशानी को हार्मोनल बदलाव का हिस्सा मान लेती हैं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, सीने से जुड़े कुछ लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। अगर सीने में दबाव, भारीपन या जकड़न महसूस हो और यह कुछ समय तक बना रहे तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। खासतौर पर अगर यह दर्द हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैल रहा हो तो यह हृदय संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। इसके अलावा अचानक सांस फूलना, अत्यधिक कमजोरी, ठंडा पसीना आना, चक्कर महसूस होना या दिल की धड़कन का बहुत तेज या अनियमित होना भी चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग हो सकते हैं
डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण कई बार पुरुषों से अलग दिखाई देते हैं। महिलाओं में हमेशा तेज सीने का दर्द ही नहीं होता, बल्कि कई बार अत्यधिक थकान, अपच जैसी समस्या, ऊपरी पेट में दर्द, बेचैनी और नींद में परेशानी जैसे संकेत भी सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि महिलाओं में हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान कई बार देर से हो पाती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच करानी चाहिए।
पेरिमेनोपॉज के दौरान दिल को स्वस्थ रखने के तरीके
पेरिमेनोपॉज के समय महिलाओं को अपनी जीवनशैली पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है। 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं को समय-समय पर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही फल, सब्जियां, साबुत अनाज, पर्याप्त प्रोटीन और कम नमक वाले भोजन को अपनी डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। रोजाना पैदल चलना, योग और हल्की एक्सरसाइज हृदय को मजबूत बनाने के साथ-साथ तनाव को कम करने में भी मदद करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त नींद और मानसिक तनाव को नियंत्रित करना भी इस दौर में बेहद जरूरी है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर सीने में अचानक तेज दर्द हो, सांस लेने में परेशानी हो, दर्द शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल रहा हो, बेहोशी जैसा महसूस हो या अचानक अत्यधिक कमजोरी आए तो इसे आपात स्थिति मानना चाहिए। ऐसे लक्षणों में देरी करना जोखिम बढ़ा सकता है। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
पेरिमेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक सामान्य चरण है, लेकिन इस दौरान हृदय स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। हार्मोनल बदलाव के कारण होने वाले सामान्य लक्षणों और हृदय संबंधी चेतावनी संकेतों के बीच अंतर समझना बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सलाह से महिलाएं इस दौर में अपने दिल को सुरक्षित रख सकती हैं।
