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'खेती नहीं छोड़ेंगे'—रामटेक में भूमि अधिग्रहण के विरोध में सड़कों पर उतरे किसान
महाराष्ट्र के नागपुर जिले के रामटेक और पारशिवनी में प्रस्तावित 3,000 हेक्टेयर MIDC परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों ने अधिग्रहण रोकने, उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग की, जबकि सरकार ने परियोजना को क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण बताया।
Neha Sharma22 जुल. 2026, 07:39 PM IST

महाराष्ट्र: नागपुर जिले के रामटेक और पारशिवनी (पारसेओनी) तहसील में प्रस्तावित महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) की औद्योगिक परियोजना को लेकर किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को बड़ी संख्या में किसानों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सरकार से अधिग्रहण प्रक्रिया तत्काल रोकने और किसानों की सहमति के बिना कोई कार्रवाई नहीं करने की मांग की।
जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा रामटेक और पारशिवनी क्षेत्र में लगभग 3,000 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के लिए मुख्य रूप से पटगोवारी (Patgowari) और आमडी (Amdi) सहित आसपास के गांवों की कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसी प्रस्ताव के विरोध में किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि जिन जमीनों का अधिग्रहण प्रस्तावित है, वे अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि हैं और अधिकांश परिवारों की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी जमीन अधिग्रहित कर ली गई तो उनके सामने रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आरोप है कि सरकार ने किसानों की आपत्तियों पर पर्याप्त विचार किए बिना अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
किसानों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह रोकी जाए, किसानों की सहमति के बिना किसी प्रकार का मापन या अधिग्रहण न किया जाए तथा परियोजना से प्रभावित सभी गांवों के किसानों के साथ विस्तृत चर्चा की जाए। किसानों ने यह भी कहा कि यदि सरकार परियोजना आगे बढ़ाना चाहती है तो पहले पुनर्वास, रोजगार और उचित मुआवजे को लेकर स्पष्ट नीति सामने रखनी चाहिए।
इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार किसानों की आवाज को नजरअंदाज कर रही है। वहीं, महायुति सरकार की ओर से राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि औद्योगिक विकास राज्य की आवश्यकता है और परियोजना से प्रभावित किसानों को नियमानुसार उचित एवं न्यायसंगत मुआवजा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी उपजाऊ कृषि भूमि छीनकर उद्योग स्थापित करना उचित नहीं होगा। उनका आग्रह है कि सरकार पहले वैकल्पिक भूमि पर विचार करे या फिर ऐसी नीति बनाए जिससे किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहें। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होने की संभावना है। इस बैठक के परिणाम पर ही यह तय होगा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या किसानों की मांगों के अनुरूप इसमें कोई बदलाव किया जाएगा। फिलहाल रामटेक का यह भूमि अधिग्रहण विवाद महाराष्ट्र की राजनीति और औद्योगिक विकास बनाम कृषि हितों के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
