health
थैलेसीमिया मरीज को समय पर नहीं मिली एम्बुलेंस, परिवार का आरोप—घंटों इंतजार के बाद पहुंची मदद।
झारखंड के धनबाद जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। थैलेसीमिया से पीड़ित एक मरीज के लिए परिवार ने आपात स्थिति में एम्बुलेंस बुलाई, लेकिन आरोप है कि मदद करीब चार घंटे की देरी से पहुंची। इस दौरान मरीज की हालत बिगड़ती रही और परिवार मदद के लिए लगातार इंतजार करता रहा। घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मरीज की हालत बिगड़ती रही, परिवार करता रहा इंतजार
परिजनों के अनुसार, थैलेसीमिया मरीज की तबीयत अचानक खराब हुई, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत थी। परिवार ने समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के लिए संपर्क किया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी वाहन नहीं पहुंचा। परिवार का आरोप है कि उन्होंने कई बार एम्बुलेंस सेवा से संपर्क किया और मरीज की गंभीर स्थिति के बारे में जानकारी दी, लेकिन इसके बावजूद मदद पहुंचने में घंटों लग गए। परिजनों का कहना है कि हर गुजरते मिनट के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही थी, क्योंकि मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी।
थैलेसीमिया मरीजों के लिए देरी बन सकती है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों को नियमित चिकित्सा निगरानी की जरूरत होती है। कई मरीजों में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने पर कमजोरी, सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए एम्बुलेंस सेवा में देरी सीधे तौर पर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकती है।
परिवार ने लगाए लापरवाही के आरोप
मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि एम्बुलेंस सेवा में हुई देरी केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही है। उनका कहना है कि यदि मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती। परिवार ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि एम्बुलेंस पहुंचने में चार घंटे की देरी क्यों हुई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आपात स्थिति में मरीजों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं कितनी प्रभावी हैं।
आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
धनबाद की इस घटना ने राज्य में एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता और प्रबंधन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य गंभीर मरीजों को कम से कम समय में अस्पताल तक पहुंचाना होता है, लेकिन ऐसी घटनाएं इस व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, एम्बुलेंस सेवा में देरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे वाहनों की कमी, कॉल मैनेजमेंट में समस्या, लोकेशन ट्रैकिंग की कमी या संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं होना। हालांकि, मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए इन कमियों को दूर करना जरूरी है।
प्रशासन से जवाब की मांग
मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही गई है। अधिकारियों की ओर से जांच कर जिम्मेदारी तय करने का आश्वासन दिया गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि एम्बुलेंस सेवा को सूचना कब मिली, वाहन कब रवाना हुआ और देरी की वास्तविक वजह क्या थी। अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
धनबाद की यह घटना सिर्फ एक मरीज के लिए एम्बुलेंस में हुई देरी का मामला नहीं है, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों के भरोसे से जुड़ा बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। थैलेसीमिया जैसे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए समय पर चिकित्सा सहायता जीवन और संकट के बीच का अंतर हो सकती है। अब निगाहें प्रशासन की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
