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सौजन्य हत्याकांड: CBI और राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, मां की याचिका से फिर जगी री-इन्वेस्टिगेशन की उम्मीद।

साल 2012 में कॉलेज से लौट रही मासूम छात्रा सौजन्य का अपहरण कर उसके साथ दरिंदगी की गई और हत्या कर शव को झाड़ियों में फेंक दिया गया था। स्थानीय पुलिस से लेकर CID और फिर CBI जांच तक, कई साल चले लंबे ट्रायल के बाद भी जांच एजेंसियां अदालत में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकीं। मुख्य आरोपी के बरी होने और शुरुआती जांच में पुलिस की गंभीर कमियों के उजागर होने के बाद से यह मामला देश में सिस्टम और न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल बना हुआ है।

Sonali23 जुल. 2026, 07:47 PM IST
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सौजन्य हत्याकांड: CBI और राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, मां की याचिका से फिर जगी री-इन्वेस्टिगेशन की उम्मीद।
कर्नाटक के बहुचर्चित सौजन्या दुष्कर्म एवं हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान (अथवा पीठ के माननीय न्यायाधीशों) के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने जांच में कथित कमियों और विरोधाभासों पर विस्तार से चर्चा की तथा याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए अपना आदेश/फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके साथ ही अदालत ने संभावित गवाहों की सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने और राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से अभी अंतिम आदेश जारी होना बाकी है।   

सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां (कुसुमावती) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष दावा किया कि पिछले 14 वर्षों में हुई जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सीबीआई के चार्जशीट दाखिल करने वाले जांच अधिकारी ने स्वयं स्वीकार किया था कि उन्होंने घटनास्थल का कभी दौरा नहीं किया। इसके अलावा पीड़िता की मां का बयान भी किसी भी जांच एजेंसी ने दर्ज नहीं किया।अदालत को यह भी बताया गया कि पीड़िता के हाथ में मिली घड़ी, जो कथित रूप से रात 2:45 बजे पर रुकी हुई थी, उसकी कभी वैज्ञानिक या फॉरेंसिक जांच नहीं कराई गई। वहीं, पीड़िता के मूल वस्त्र बरामद न होने के बावजूद जांच अधिकारी द्वारा बाद में घर से दूसरे वस्त्र लेकर जांच रिकॉर्ड में शामिल किए जाने का भी मुद्दा उठाया गया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वर्ष 2021 में ट्रायल कोर्ट में सीबीआई द्वारा दायर उस आवेदन का भी हवाला दिया गया, जिसमें एजेंसी ने चार गवाहों के बयानों के आधार पर कहा था कि तीन स्थानीय व्यक्तियों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता और उनके खिलाफ आगे कार्रवाई आवश्यक है। इसके बावजूद बाद में एजेंसी ने अलग रुख अपनाया, जिसे लेकर अदालत में सवाल खड़े किए गए।जब सीबीआई ने दोबारा जांच (Reinvestigation) की मांग का विरोध किया तो सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा कि "आखिर किसे बचाने की कोशिश की जा रही है?" पीठ ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति (संतोष राव) के खिलाफ सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल किया था, उसे अदालत बरी कर चुकी है और अब वही सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहा है। ऐसे में यदि जांच में कहीं चूक हुई है तो उसकी पड़ताल का विरोध क्यों किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी की कि जांच अधिकारी ने स्वतंत्र जांच करने के बजाय पहले से दर्ज बयानों की नई व्याख्या कर आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या वर्षों बाद भी सीबीआई यह कहना चाहती है कि वह नए साक्ष्य जुटाने में सक्षम नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि शुरुआती जांच में गंभीर खामियां रही हैं तो न्याय व्यवस्था की साख प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, मामले में बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee - CWC) एवं संबंधित जांच निकायों की भूमिका पर भी चर्चा हुई, जहां पूर्व में दिए गए बयानों और रिपोर्टों की कमियों को उजागर किया गया।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा बताए गए संभावित गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार की अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार कई गवाहों को खोजकर सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई, जबकि यह दावा किया गया कि इन व्यक्तियों से पिछले 14 वर्षों में किसी भी जांच एजेंसी ने पूछताछ नहीं की थी। सुनवाई के अंत में पीड़िता की मां की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि मामले की दोबारा जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। अधिवक्ता ने दलील दी कि शीर्ष अदालत की निगरानी में होने वाली जांच से ही निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकती है।   

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है। साथ ही गवाहों की सुरक्षा जारी रखने और संबंधित प्राधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अंतिम निर्णय आने के बाद ही आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।