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MBBS में दाखिले के नाम पर 26 लाख रुपये की ठगी, मुंबई में चार आरोपियों पर केस दर्ज।

मुंबई में एमबीबीएस में दाखिला दिलाने का झांसा देकर एक परिवार से 26 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर अंबोली पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है। पुलिस बैंक लेन-देन, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। यह मामला मेडिकल एडमिशन के नाम पर सक्रिय फर्जी एजेंटों से सतर्क रहने की जरूरत को भी उजागर करता है।

Anshuman Mishra23 जुल. 2026, 08:21 PM IST
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MBBS में दाखिले के नाम पर 26 लाख रुपये की ठगी, मुंबई में चार आरोपियों पर केस दर्ज।
मुंबई: MBBS में प्रवेश का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। मुंबई के अंबोली पुलिस स्टेशन में चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का भरोसा देकर एक परिवार से 26 लाख रुपये लिए गए, लेकिन न तो प्रवेश दिलाया गया और न ही पूरी रकम वापस की गई। इस घटना ने एक बार फिर मेडिकल एडमिशन के नाम पर सक्रिय फर्जी एजेंटों और दलालों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता रमाकांत नारायण शेटये (56) मुंबई के परेल स्थित सेंट्रल रेलवे लोको वर्कशॉप में वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर हैं। उनकी बेटी ने वर्ष 2025 की नीट-यूजी परीक्षा में लगभग 200 अंक प्राप्त किए थे। बेटी को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने की कोशिश के दौरान उनके सहकर्मी प्रदीप सोनवणे ने उनकी मुलाकात मंगेश भारणुके से कराई। आरोप है कि मंगेश और उसके साथियों ने दावा किया कि उनके संपर्कों के जरिए मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट दिलाई जा सकती है।

30 लाख की मांग, 26 लाख रुपये लिए
शिकायत के अनुसार शुरुआत में आरोपियों ने एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के बदले 30 लाख रुपये की मांग की। बाद में बातचीत के बाद यह राशि 26 लाख रुपये तय हुई। परिवार ने अलग-अलग चरणों में आरोपियों को पैसे दे दिए। हालांकि लंबे समय तक उन्हें केवल आश्वासन दिया जाता रहा और दाखिले की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। जब परिवार ने पैसे वापस मांगे तो रकम भी वापस नहीं की गई। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। अंबोली पुलिस ने प्रदीप सोनवणे, मंगेश भारणुके, वीणा सोनवणे और युग शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस बैंक खातों में हुए लेन-देन, दस्तावेजों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। यदि जांच में संगठित एडमिशन रैकेट के सबूत मिलते हैं तो मामले में अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

मेडिकल एडमिशन में क्यों होती हैं ऐसी ठगी?
विशेषज्ञों के अनुसार हर साल लाखों छात्र NEET-UG परीक्षा देते हैं, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या सीमित होती है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग "मैनेजमेंट कोटा", "एनआरआई कोटा", "डायरेक्ट एडमिशन", "गारंटीड सीट" या "ऊंचे संपर्क" के नाम पर अभिभावकों को झांसा देते हैं। कई मामलों में फर्जी काउंसलिंग, नकली ऑफर लेटर और फर्जी कॉलेज दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया जाता है। भारत में एमबीबीएस में प्रवेश केवल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के आधार पर होता है। इसके बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा अखिल भारतीय कोटा की काउंसलिंग और संबंधित राज्यों द्वारा राज्य कोटा की काउंसलिंग कराई जाती है। सरकारी, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में प्रवेश निर्धारित नियमों और मेरिट के आधार पर होता है। कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत प्रभाव या निजी संपर्क के जरिए सीट दिलाने का कानूनी अधिकार नहीं रखता।

विद्यार्थियों और अभिभावकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
मेडिकल शिक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रवेश प्रक्रिया केवल अधिकृत काउंसलिंग पोर्टल के माध्यम से ही पूरी करें। किसी एजेंट, बिचौलिए या निजी व्यक्ति के भरोसे प्रवेश का दावा स्वीकार न करें। किसी भी भुगतान से पहले संबंधित कॉलेज की मान्यता, काउंसलिंग प्रक्रिया और दस्तावेजों की आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि अवश्य करें। यदि कोई व्यक्ति निश्चित सीट या मेरिट से हटकर प्रवेश का दावा करे तो तुरंत सतर्क हो जाएं और जरूरत पड़ने पर पुलिस या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। यह घटना केवल एक परिवार के साथ हुई आर्थिक ठगी नहीं है, बल्कि देशभर के उन लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए चेतावनी है जो मेडिकल प्रवेश की प्रक्रिया से गुजरते हैं। मेडिकल सीटों की भारी मांग और सीमित उपलब्धता का फायदा उठाकर ठग सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे मामलों में समय पर पुलिस शिकायत और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि इस तरह के मामलों पर सख्ती से कार्रवाई होती है तो भविष्य में एडमिशन माफिया और फर्जी एजेंटों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही छात्रों का भरोसा पारदर्शी और मेरिट आधारित प्रवेश प्रणाली पर मजबूत होगा।