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लोकमान्य तिलक जयंती: PM मोदी ने महान स्वतंत्रता सेनानी को दी श्रद्धांजलि।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। PM मोदी ने तिलक के राष्ट्रवाद, जनसेवा और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने में योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचार और लेखन ने देशवासियों में आत्मविश्वास, गौरव और राष्ट्रीय चेतना की भावना को मजबूत किया।

Neha Sharma23 जुल. 2026, 08:26 PM IST
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लोकमान्य तिलक जयंती: PM मोदी ने महान स्वतंत्रता सेनानी को दी श्रद्धांजलि।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को महान स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रवादी नेता और समाज सुधारक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने लोकमान्य तिलक को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महान व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उन्होंने देशवासियों में राष्ट्रवाद की भावना जगाने और कई पीढ़ियों को जनसेवा के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से लोकमान्य तिलक को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में तिलक का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा और उन्होंने अपने विचारों तथा संघर्ष के जरिए लोगों के भीतर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना की भावना को मजबूत किया।


प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि लोकमान्य तिलक ने राष्ट्रवाद की भावना को जागृत किया और पीढ़ियों को लोगों की सेवा के लिए खुद को समर्पित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति को लोकप्रिय बनाने और समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करने के लिए तिलक द्वारा किए गए प्रयास भी उतने ही प्रेरणादायक हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, तिलक के लेखन ने लोगों में नया आत्मविश्वास पैदा किया और उनके भीतर गौरव तथा स्वाभिमान की भावना को मजबूत किया। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था। वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन प्रमुख नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ राजनीतिक जागरूकता और जनभागीदारी को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें आम जनता के बीच लोकप्रियता और सम्मान के कारण 'लोकमान्य' की उपाधि मिली। वह लाल-बाल-पाल की प्रसिद्ध राष्ट्रवादी तिकड़ी का भी हिस्सा थे, जिसमें लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल शामिल थे।


तिलक का राजनीतिक विचार स्वराज और राष्ट्रीय आत्मसम्मान पर केंद्रित था। उन्होंने भारतीयों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ संगठित होने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। उनके विचारों ने स्वतंत्रता आंदोलन को केवल शिक्षित और राजनीतिक वर्ग तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों के बीच राष्ट्रीय चेतना फैलाने में योगदान दिया। लोकमान्य तिलक ने पत्रकारिता को भी राष्ट्रवादी विचारों के प्रचार का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया। उनके लेखन के जरिए ब्रिटिश शासन की नीतियों की आलोचना की गई और भारतीयों में राजनीतिक जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने संदेश में तिलक के लेखन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लेखों ने लोगों में आत्मविश्वास और गौरव की भावना को बढ़ावा दिया।


तिलक की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सार्वजनिक गणेश उत्सव को लोकप्रिय बनाना भी माना जाता है। उन्होंने गणेश उत्सव को बड़े सार्वजनिक आयोजन के रूप में बढ़ावा दिया, जिससे लोगों को एक मंच पर एकत्र होने और सामाजिक तथा सांस्कृतिक एकजुटता को मजबूत करने का अवसर मिला। इन आयोजनों ने उस दौर में राष्ट्रीय चेतना और जनसंपर्क को बढ़ाने में भी भूमिका निभाई। उनके प्रयासों ने भारतीय संस्कृति और सामूहिक पहचान को मजबूत करने में योगदान दिया। लोकमान्य तिलक का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं था। उन्होंने शिक्षा, पत्रकारिता, सामाजिक जागरूकता और जनसंगठन के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया। उनका मानना था कि देश की स्वतंत्रता के लिए जनता का शिक्षित, जागरूक और संगठित होना जरूरी है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकमान्य तिलक को दी गई श्रद्धांजलि में उनके इसी व्यापक योगदान को याद किया गया। प्रधानमंत्री ने तिलक को ऐसे राष्ट्रवादी नेता के रूप में याद किया, जिन्होंने लोगों में देश के प्रति जिम्मेदारी और सेवा की भावना को मजबूत किया। उनके अनुसार, तिलक के विचार और उनकी विरासत आज भी लोगों को राष्ट्र निर्माण और जनसेवा के लिए प्रेरित करती है। 23 जुलाई को लोकमान्य तिलक की जयंती के साथ स्वतंत्रता संग्राम के एक अन्य प्रमुख क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती भी मनाई जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने आज चंद्रशेखर आजाद को भी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साहस तथा देशभक्ति को याद किया। दोनों स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।


लोकमान्य तिलक की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि ने एक बार फिर स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर और उन नेताओं के योगदान को सामने रखा, जिन्होंने भारत में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तिलक की राष्ट्रवाद, जनसेवा, शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक एकजुटता से जुड़ी विरासत आज भी भारतीय इतिहास और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण मानी जाती है।