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दुनिया के 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी हिंसा का शिकार, WHO की चेतावनी—अस्पतालों में बढ़ता खतरा मरीजों की सुरक्षा पर भी भारी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी अपने कार्यस्थल पर किसी न किसी प्रकार की हिंसा का सामना करते हैं। भारत में भी डॉक्टरों और नर्सों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने हाल ही में डॉक्टरों पर हुए 100 हमलों का डिजिटल रिकॉर्ड जारी कर स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।

Kalpana Gautam23 जुल. 2026, 08:29 PM IST
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दुनिया के 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी हिंसा का शिकार, WHO की चेतावनी—अस्पतालों में बढ़ता खतरा मरीजों की सुरक्षा पर भी भारी।
नई दिल्ली: अस्पताल, जहां लोगों को जीवन बचाने की उम्मीद होती है, वहीं अब स्वास्थ्यकर्मियों के लिए असुरक्षित कार्यस्थल बनते जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 40% स्वास्थ्यकर्मी अपने कार्यकाल के दौरान हिंसा, धमकी, दुर्व्यवहार या शारीरिक हमलों का सामना करते हैं। अधिकतर मामलों में मरीजों या उनके परिजनों द्वारा यह हिंसा की जाती है। 

भारत में यह मुद्दा हाल के दिनों में फिर चर्चा में आया, जब महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आई। इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने देशभर में डॉक्टरों पर हुए 100 हमलों का एक इंटरैक्टिव डिजिटल रिकॉर्ड जारी किया और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून लागू करने की मांग दोहराई। 
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WHO का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ होने वाली हिंसा केवल कर्मचारियों की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि इससे मरीजों की देखभाल, उपचार की गुणवत्ता और पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लगातार हिंसा का सामना करने वाले डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मानसिक तनाव, अवसाद, बर्नआउट और नौकरी छोड़ने जैसी समस्याओं से भी जूझते हैं। 

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, हिंसा के मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई, स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा प्रशिक्षण देने और मरीजों व उनके परिजनों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डॉक्टर और नर्स स्वयं सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देना भी कठिन हो जाएगा। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल उनके हित में नहीं, बल्कि पूरे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए आवश्यक है।