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बारिश में धूप की कमी बन सकती है सेहत पर भारी: क्या लगातार बादल छाए रहने से बढ़ रहा है विटामिन D की कमी!

मानसून की ठंडी फुहारें भले ही सुकून देती हों, लेकिन लगातार कई दिनों तक धूप न निकलने से शरीर में विटामिन D का स्तर प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर केवल हड्डियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नींद की गुणवत्ता, मानसिक स्वास्थ्य, ऊर्जा और प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी पड़ सकता है। ऐसे में संतुलित आहार, सीमित धूप और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है।

Kalpana Gautam23 जुल. 2026, 08:29 PM IST
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बारिश में धूप की कमी बन सकती है सेहत पर भारी: क्या लगातार बादल छाए रहने से बढ़ रहा है विटामिन D की कमी!
नई दिल्ली: मानसून का मौसम अपने साथ ठंडक, हरियाली और राहत लेकर आता है, लेकिन लगातार बादलों से ढका आसमान शरीर की सेहत पर एक ऐसा असर भी डाल सकता है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई सप्ताह तक पर्याप्त धूप न मिलने से शरीर में विटामिन D का निर्माण प्रभावित हो सकता है, जिसका असर केवल हड्डियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नींद, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर पर भी दिखाई देता है।

भारत जैसे धूप वाले देश में भी मानसून के दौरान लगातार बादल छाए रहने के कारण लोगों को पर्याप्त सूर्य प्रकाश नहीं मिल पाता। विटामिन D का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत सूर्य की UVB किरणें हैं, जो त्वचा के माध्यम से शरीर में विटामिन D बनाने में मदद करती हैं। जब कई दिनों तक धूप नहीं निकलती, तो यह प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।

नींद और मूड पर भी पड़ता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार, धूप केवल विटामिन D का स्रोत नहीं है, बल्कि यह शरीर की जैविक घड़ी (Body Clock) को भी नियंत्रित करती है। पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी न मिलने पर शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोनों का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसका परिणाम देर से नींद आना, दिनभर थकान महसूस होना, चिड़चिड़ापन, उदासी और काम में मन न लगने जैसी समस्याओं के रूप में सामने आ सकता है।

किन लोगों को अधिक सावधान रहने की जरूरत?
डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों में विटामिन D की कमी का खतरा अधिक होता है, जैसे—

  • बुजुर्ग
  • गर्भवती महिलाएं
  • छोटे बच्चे
  • लंबे समय तक घर या कार्यालय के अंदर रहने वाले लोग
  • पहले से विटामिन D की कमी से जूझ रहे मरीज
यदि लगातार थकान, मांसपेशियों में दर्द, हड्डियों में कमजोरी या बार-बार संक्रमण जैसी शिकायतें बनी रहें, तो चिकित्सक की सलाह पर विटामिन D की जांच कराना उचित हो सकता है।

क्या केवल सप्लीमेंट लेना ही समाधान है?
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन D की दवाएं या सप्लीमेंट लेना सही नहीं है। जरूरत के अनुसार जांच के बाद ही उचित मात्रा तय की जानी चाहिए। इसके साथ ही आहार में अंडा, वसायुक्त मछली, फोर्टिफाइड दूध, दही, मशरूम और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करना लाभदायक हो सकता है।

मानसून में रखें इन बातों का ध्यान
  • जब भी धूप निकले, कुछ समय खुले वातावरण में बिताएं।
  • रोजाना हल्की शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें।
  • नियमित समय पर सोएं और पर्याप्त नींद लें।
  • संतुलित एवं पोषक आहार का सेवन करें।
  • बिना चिकित्सकीय सलाह के विटामिन D सप्लीमेंट शुरू न करें।
विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि मानसून का आनंद जरूर लें, लेकिन अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव कर शरीर को पर्याप्त पोषण और प्राकृतिक रोशनी देना भी उतना ही जरूरी है। यदि लंबे समय तक थकान, नींद की समस्या या लगातार उदासी बनी रहे, तो इसे केवल मौसम का प्रभाव मानकर नजरअंदाज न करें, बल्कि विशेषज्ञ से सलाह लें।