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आंदोलनकारी छात्र आतंकवादी नहीं, उन पर लाठीचार्ज क्यों? राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर सवाल।
NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र आतंकवादी नहीं, बल्कि देश का भविष्य हैं। उन्होंने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले युवाओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने विपक्ष पर आंदोलन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है।
Priyanka Gaikwad23 जुल. 2026, 08:32 PM IST

नई दिल्ली: दिल्ली में छात्रों द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद धक्का-मुक्की और झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया और कई छात्रों को हिरासत में लिया। घटना के बाद राहुल गांधी ने प्रेस से बातचीत में कहा कि आंदोलनकारी छात्र देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं तो उनके खिलाफ लाठीचार्ज लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। राहुल गांधी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। वहीं धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है तथा पेपर लीक मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस बीच संसद के भीतर और बाहर भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया, जबकि भाजपा ने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
उद्धव ठाकरे ने भी छात्रों के मुद्दे पर सरकार से संवाद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बातचीत ही समस्याओं का समाधान है और सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए।
फिलहाल छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। यह मामला अब केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में विश्वास और लोकतांत्रिक अधिकारों से भी जुड़ गया है।
