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सूरत में छात्रा का पीछा करने वाले ड्राइवर को दो साल की जेल, अदालत ने कहा – अपराध की गंभीरता समझनी होगी।

सूरत की विशेष अदालत ने 36 वर्षीय ड्राइवर राजकुमार नायक को 17 वर्षीय छात्रा का पीछा करने और यौन उत्पीड़न करने के मामले में दो साल की साधारण कैद और ₹5,000 जुर्माने की सज़ा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अपराधी को ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए जिससे वह अपने अपराध की गंभीरता को समझ सके। यह घटना दिसंबर 2024 की है, जब छात्रा ट्यूशन क्लास से लौट रही थी और आरोपी ने उसका पीछा कर अश्लील हरकतें की थीं।

Sonali24 जुल. 2026, 12:32 AM IST
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सूरत में छात्रा का पीछा करने वाले ड्राइवर को दो साल की जेल, अदालत ने कहा – अपराध की गंभीरता समझनी होगी।
सूरत में नाबालिग छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला सामने आया है। ट्यूशन क्लास आते-जाते समय 17 वर्षीय छात्रा को लगातार परेशान करने और उसके साथ छेड़छाड़ करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए दो साल की साधारण कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

तथ्य जांच और घटनाक्रम का ब्योरा:
यह मामला 17 दिसंबर 2024 का है, जब पीड़िता शाम के समय अपनी ट्यूशन क्लास से घर लौट रही थी। सूरत के उमरा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के पास एक बगीचे के करीब आरोपी ड्राइवर राजकुमार नायक (उम्र 36 वर्ष) ने लड़की का पीछा किया और अश्लील फब्तियां कसीं। जब लड़की ने इस हरकत को नजरअंदाज किया, तो आरोपी ने उसका हाथ पकड़कर यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया। घटना के बाद पीड़िता ने घर जाकर अपने परिजनों को पूरी बात बताई। बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंतित पिता ने 19 दिसंबर 2024 को गुप्त रूप से उसका पीछा किया। उसी दिन आरोपी ने फिर से छात्रा का रास्ता रोका और अश्लील हरकतें कीं। पीड़िता के शोर मचाने पर पिता ने तुरंत हस्तक्षेप किया, लेकिन आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहा। इस घटना से बुरी तरह आहत होकर नाबालिग लड़की ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था। 20 दिसंबर 2024 को पीड़िता की मां ने उमरा थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजकुमार नायक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल किया।

अदालत की सख्त टिप्पणी:
मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एच. एम. व्यास ने 18 जुलाई 2026 को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि आरोपी और पीड़िता के बीच पहले से कोई परिचय नहीं था। आरोपी ने पीड़िता के अकेलेपन का फायदा उठाकर जानबूझकर इस वारदात को अंजाम दिया। फैसला सुनाते समय जज ने कहा कि नाबालिग बच्चों के खिलाफ ऐसे अपराधों पर सख्त रुख अपनाना आवश्यक है। अपराधी को ऐसी सजा मिलना अनिवार्य है जिससे उसे अपने किए गए अपराध की गंभीरता का सही अहसास हो सके।
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक लोक अभियोजक वी. एल. फलदु ने अदालत में 8 गवाहों और 13 दस्तावेजी साक्ष्यों के जरिए अपराध को साबित किया। उन्होंने दलील दी कि सरेराह होने वाली ऐसी घटनाएं समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और सख्त सजा से ही अपराधियों में कानून का खौफ पैदा होगा।