government

पटना में गंगा किनारे हटेगा अतिक्रमण, सुप्रीम कोर्ट ने दिया 6 हफ्ते का समय

सुप्रीम कोर्ट ने पटना में गंगा नदी के किनारे नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच मौजूद अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण को छह सप्ताह के भीतर हटाने का निर्देश बिहार सरकार को दिया है। अदालत ने कार्रवाई पूरी होने के बाद अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा है। कोर्ट का यह कदम गंगा के पर्यावरण, नदी के प्राकृतिक प्रवाह और बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Neha Sharma24 जुल. 2026, 12:32 AM IST
खबर शेयर करें:
पटना में गंगा किनारे हटेगा अतिक्रमण, सुप्रीम कोर्ट ने दिया 6 हफ्ते का समय

नई दिल्ली/पटना: गंगा नदी के किनारे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बिहार सरकार को पटना में नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच गंगा नदी के किनारे मौजूद सभी अनधिकृत ढांचों, निर्माण और अतिक्रमण को छह सप्ताह के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का पालन हर हाल में किया जाना चाहिए और किसी अन्य अदालत के अंतरिम आदेश का हवाला देकर कार्रवाई को रोका नहीं जा सकता।


सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन शामिल थे, ने मामले की सुनवाई करते हुए बिहार सरकार को कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि कार्रवाई पूरी होने के बाद सक्षम अधिकारी को अगली सुनवाई तक अनुपालन रिपोर्ट हलफनामे के माध्यम से दाखिल करनी होगी। कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने में किसी भी तरह की ढिलाई को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद पटना में संबंधित क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। अब बिहार सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करनी होगी।


नौजर घाट से नूरपुर घाट तक हटेगा अतिक्रमण

सुप्रीम कोर्ट का ताजा निर्देश पटना में गंगा के किनारे नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच के क्षेत्र पर लागू होगा। इस इलाके में मौजूद अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण को हटाने की जिम्मेदारी बिहार सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य अदालत की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने वाला कोई अंतरिम आदेश लागू है, तब भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। इस टिप्पणी के बाद अब प्रशासन के सामने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को समय सीमा के भीतर पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी है।


पहले भी सामने आ चुकी है अतिक्रमण की समस्या

गंगा किनारे अतिक्रमण का मुद्दा पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने उठ चुका है। मार्च 2026 में अदालत के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार, दीघा घाट से नौजर घाट के बीच चिन्हित 213 अतिक्रमणों में से केवल 58 हटाए गए थे, जबकि 145 अतिक्रमण अभी भी मौजूद थे। उस समय बिहार सरकार ने कार्रवाई में देरी के पीछे विभिन्न अदालतों के अंतरिम आदेशों को एक कारण बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब पटना के नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच अतिक्रमण हटाने को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है। अदालत ने बिहार सरकार को छह सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी करने और इसकी अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।


गंगा के पर्यावरण और बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा पर जोर

मामले की सुनवाई के दौरान गंगा नदी और उसके किनारे के पर्यावरण को लेकर भी चिंता जताई गई है। सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में गंगा के किनारों और बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। अदालत ने पहले भी पटना और उसके आसपास गंगा के किनारे आगे किसी नए अवैध निर्माण या अनधिकृत अतिक्रमण को रोकने के निर्देश दिए थे। गंगा नदी के किनारे अवैध निर्माण से नदी के प्राकृतिक प्रवाह, बाढ़ क्षेत्र और पर्यावरण पर असर पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में अतिक्रमण हटाने का यह मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी के पर्यावरण और उसके प्राकृतिक क्षेत्र की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।


सभी राज्यों से मांगी गई अतिक्रमण की जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी से जुड़े व्यापक मामले में अन्य राज्यों से भी नदी के किनारे मौजूद अतिक्रमण की जानकारी देने को कहा है। अदालत ने राज्यों को इस संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने का अंतिम अवसर दिया है और संकेत दिया है कि आदेश का पालन नहीं करने वाले राज्यों के मुख्य सचिवों को अदालत में बुलाया जा सकता है। इससे साफ है कि सुप्रीम कोर्ट गंगा नदी के किनारे अतिक्रमण और अवैध निर्माण के मामले को गंभीरता से देख रहा है। अदालत का उद्देश्य केवल पटना तक सीमित कार्रवाई करना नहीं, बल्कि गंगा के पूरे नदी तंत्र और उसके किनारों को अतिक्रमण से बचाने के लिए व्यापक स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करना भी है।


अब बिहार सरकार के सामने बड़ी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने छह सप्ताह के भीतर नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच सभी अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण हटाने की चुनौती है। इसके साथ ही प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस क्षेत्र में दोबारा अवैध निर्माण या अतिक्रमण न हो। अदालत ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देकर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। ऐसे में आने वाले सप्ताह बिहार सरकार और पटना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होंगे।


कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पटना में गंगा नदी के किनारे अतिक्रमण हटाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि बिहार सरकार निर्धारित छह सप्ताह की समयसीमा में कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है और अगली सुनवाई में अदालत के सामने क्या अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाती है।