international
ईरान युद्ध ने बढ़ाई अमेरिकी राजनीति की गर्मी, ट्रंप और कार्लसन आमने-सामने
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति की आलोचना करते हुए दावा किया कि अमेरिका की नीतियों पर इज़राइल का गहरा प्रभाव है। उनके इस बयान से अमेरिकी राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। हालांकि, यह कार्लसन का व्यक्तिगत राजनीतिक मत है, कोई आधिकारिक तथ्य नहीं।
Neha Sharma24 जुल. 2026, 12:32 AM IST

वॉशिंगटन: अमेरिका के चर्चित राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा विवादित बयान दिया है। कार्लसन ने आरोप लगाया कि अमेरिका अब अपनी स्वतंत्र विदेश नीति नहीं चला रहा और इज़राइल का प्रभाव अमेरिकी निर्णयों पर हावी हो चुका है। उनका कहना था कि अमेरिका ने अपनी संप्रभुता (Sovereignty) काफी पहले खो दी थी और ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई इसका ताज़ा उदाहरण है।
कार्लसन ने अपने कार्यक्रम में कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष अमेरिका का युद्ध नहीं, बल्कि इज़राइल का युद्ध है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका इस संघर्ष में अपने राष्ट्रीय हितों के बजाय इज़राइल की रणनीति के अनुसार कदम उठा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी नेतृत्व पर इज़राइली सरकार का गहरा प्रभाव है, जिससे अमेरिका की विदेश नीति प्रभावित हो रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, ईरानी जवाबी हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा संकट ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में कार्लसन ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस युद्ध से अमेरिका को कोई सीधा लाभ नहीं मिलेगा।
कार्लसन की टिप्पणी ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी विदेश नीति को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। जहां ट्रंप समर्थक इस सैन्य कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहे हैं, वहीं कार्लसन जैसे कुछ रूढ़िवादी नेताओं का मानना है कि अमेरिका को दूसरे देशों के युद्धों से दूर रहना चाहिए और "America First" नीति पर लौटना चाहिए।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि "इज़राइल अमेरिका को नियंत्रित करता है" जैसा दावा टकर कार्लसन का व्यक्तिगत राजनीतिक मत है। इसे किसी आधिकारिक अमेरिकी एजेंसी या स्वतंत्र जांच द्वारा तथ्य के रूप में प्रमाणित नहीं किया गया है। इस बयान पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की राय भी बंटी हुई है।
