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स्मार्ट प्लग से ATM हैक कर लाखों की ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार l
गाजियाबाद के साहिबाबाद पुलिस ने एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) को हैक कर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चार लाख रुपये नकद, एक स्कॉर्पियो, एक सेंट्रो कार, स्मार्ट प्लग, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी मशीन की बिजली आपूर्ति को स्मार्ट प्लग और मोबाइल ऐप के जरिए नियंत्रित कर नकदी फंसा देते थे और बाद में मशीन खोलकर पैसे निकाल लेते थे। गिरोह ने दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और अन्य राज्यों में दर्ज मामलों की जांच कर रही है।

गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर लाखों रुपये की ठगी करता था। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से चार लाख रुपये नकद, अपराध की रकम से खरीदी गई एक स्कॉर्पियो, वारदात में इस्तेमाल की गई एक सेंट्रो कार, स्मार्ट प्लग, मोबाइल फोन और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, इस मामले की शुरुआत केनरा बैंक की राजेंद्र नगर शाखा की शाखा प्रबंधक छवि ऐरन की शिकायत से हुई। शिकायत में बताया गया था कि 27 से 29 जून के बीच बैंक की कैश डिपॉजिट मशीन से अज्ञात लोगों ने छेड़छाड़ कर नकदी निकाल ली। शिकायत मिलने के बाद साहिबाबाद थाने में मामला दर्ज किया गया और जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय खुफिया सूचना और मुखबिरों की मदद से आरोपियों की पहचान की। इसके बाद 21 और 22 जुलाई की रात साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास स्थित अंडरपास से चार आरोपियों—अहसान, सिराज, आरिफ और रहीश—को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे वारदात से पहले एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीन की बिजली आपूर्ति में गुप्त रूप से स्मार्ट प्लग लगा देते थे। यह स्मार्ट प्लग मोबाइल में इंस्टॉल Smart Life App के जरिए नियंत्रित किया जाता था। जैसे ही कोई ग्राहक मशीन में पैसे जमा करता या लेनदेन शुरू करता, आरोपी मोबाइल ऐप के जरिए बिजली की आपूर्ति बंद कर देते थे।
बिजली बंद होने के कारण मशीन की प्रक्रिया बीच में रुक जाती थी और नकदी मशीन की ट्रे या ऊपरी हिस्से में फंस जाती थी। ग्राहक मशीन खराब समझकर वहां से चला जाता था। इसके बाद आरोपी विशेष रूप से तैयार किए गए लोहे के औजार और पेचकस की मदद से मशीन खोलकर अंदर फंसी नकदी निकाल लेते थे। पुलिस के मुताबिक, पूरी वारदात इतनी योजनाबद्ध तरीके से की जाती थी कि शुरुआत में किसी को इस ठगी का पता भी नहीं चलता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह अधिकतर वारदात बैंक खुलने से पहले, देर रात या छुट्टी वाले दिनों में करता था, ताकि बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों को तुरंत संदेह न हो। गिरोह के दो सदस्य मशीन से छेड़छाड़ करते थे, जबकि अन्य दो आरोपी आसपास निगरानी रखते थे और पुलिस या अन्य लोगों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखते थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने राजेंद्र नगर स्थित केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक की कैश डिपॉजिट मशीनों को भी इसी तकनीक से निशाना बनाया था। इसके अलावा गिरोह ने दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम देने की बात भी कबूल की है।
पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। बरामद मोबाइल फोन, स्मार्ट प्लग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन उपकरणों से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि गिरोह ने अब तक कितनी एटीएम और सीडीएम मशीनों को निशाना बनाया और कुल कितनी रकम की ठगी की। साहिबाबाद पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है। संभावना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और कई अन्य वारदातों का भी खुलासा हो सकता है।
