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IPL सट्टेबाजी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई l

आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आलोक कुमार जैन को गिरफ्तार किया है। ED के अनुसार, आरोपी विदेशी ऑनलाइन बेटिंग पोर्टलों के जरिए संगठित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क संचालित करता था और उससे अर्जित धन को छिपाने के लिए कई बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। जांच में आरोप है कि घरेलू कर्मचारियों के केवाईसी दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी तरीके से खाते खुलवाए गए और उन्हीं खातों के जरिए अवैध रकम का लेनदेन किया गया। बाद में इस धन को बुलियन, सोना, लग्जरी सामान और अचल संपत्तियों में निवेश कर वैध रूप देने की कोशिश की गई। जांच में आरोपी की घोषित आय और वास्तविक संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर भी सामने आया है। विशेष PMLA अदालत ने आरोपी को चार दिन की ED हिरासत में भेज दिया है। एजेंसी अब पूरे नेटवर्क, अवैध धन के स्रोत और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

Kashish Rai24 जुल. 2026, 12:32 AM IST
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IPL सट्टेबाजी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई l

 प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आईपीएल सीजन के दौरान कथित अवैध सट्टेबाजी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आलोक कुमार जैन को गिरफ्तार किया है। गुवाहाटी जोनल कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपी को 20 जुलाई 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन को छिपाने और उसे वैध बनाने के आरोपों की जांच के दौरान की गई है।


ED की जांच में सामने आया है कि आलोक कुमार जैन कथित तौर पर विदेशी ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म Sky Exchange, WIFI Exchange और Bull Intraconnect के माध्यम से आईपीएल मैचों पर बड़े स्तर पर अवैध सट्टेबाजी का संचालन करता था। एजेंसी के अनुसार, वह पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक था और सट्टेबाजी से होने वाले लेनदेन के निपटारे की जिम्मेदारी भी उसी के पास थी। जांच में यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में अवैध धन एकत्र किया जाता था।


प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अवैध कमाई को छिपाने और उसकी वास्तविक पहचान मिटाने के लिए आरोपी ने कथित तौर पर अपने घरेलू कर्मचारियों के केवाईसी दस्तावेजों का दुरुपयोग किया। इन दस्तावेजों के आधार पर कई बैंक खाते खुलवाए गए, जिन्हें आरोपी के मोबाइल नंबर से जोड़ा गया था। इन खातों का उपयोग कथित तौर पर सट्टेबाजी से प्राप्त धन को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर उसके स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था। जांच एजेंसी का कहना है कि वास्तविक खाताधारकों को इन खातों के संचालन की जानकारी तक नहीं थी।


ED ने अपनी जांच में जब्त वित्तीय दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और लेजर का भी विश्लेषण किया। जांच के दौरान यह सामने आया कि सट्टेबाजी से प्राप्त धन को बुलियन, सोना, लग्जरी लाइफस्टाइल उत्पादों और अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने कम समय में बड़ी मात्रा में धन को कारोबारी माध्यमों से वैध संपत्तियों में परिवर्तित करने का प्रयास किया। इसके अलावा आयकर रिटर्न में घोषित आय की तुलना में उसकी वास्तविक संपत्तियां, वित्तीय लेनदेन, परिवार के सदस्यों को धन हस्तांतरण, ऋण और कई अचल संपत्तियों पर नियंत्रण जैसी गतिविधियां काफी अधिक पाई गईं, जिनकी जांच अभी जारी है।


ED ने बताया कि आलोक कुमार जैन पहले से ही इस मामले के मूल (Predicate) अपराध में न्यायिक हिरासत में था। इसके बाद विशेष PMLA अदालत में प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन किया गया। अदालत से अनुमति मिलने के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। बाद में विशेष अदालत ने आरोपी को चार दिन की ED हिरासत में भेज दिया, ताकि उससे पूछताछ कर अवैध धन की कुल मात्रा, उसके इस्तेमाल के तरीकों और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।


प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद से पूरे नेटवर्क की परतें खोलने का प्रयास कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवैध सट्टेबाजी से कुल कितनी धनराशि अर्जित हुई, उसे किन माध्यमों से मनी लॉन्ड्रिंग कर वैध बनाया गया और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे। ED ने संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।