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53 करोड़ की बोगस बिलिंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 9.54 करोड़ के GST फ्रॉड का खुलासा l

छत्तीसगढ़ राज्य जीएसटी विभाग ने फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 53 करोड़ रुपये की कथित बोगस बिलिंग के मास्टरमाइंड विजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने दो फर्जी फर्मों के जरिए 53 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग कर करीब 9.54 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट विभिन्न कंपनियों को हस्तांतरित किया। आरोपी पर बंद और अस्तित्वहीन फर्मों के जरिए भी फर्जी आईटीसी का दावा करने का आरोप है। न्यायालय ने आरोपी को 3 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है, जबकि राज्य जीएसटी विभाग पूरे नेटवर्क की जांच में जुटा है।

Kashish Rai24 जुल. 2026, 12:33 AM IST
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53 करोड़ की बोगस बिलिंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 9.54 करोड़ के GST फ्रॉड का खुलासा l

छत्तीसगढ़ राज्य जीएसटी विभाग ने फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 53 करोड़ रुपये की कथित बोगस बिलिंग के मास्टरमाइंड विजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। विभाग के अनुसार आरोपी को 20 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया और न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उसे 3 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। मामले में करीब 9.54 करोड़ रुपये के टैक्स फ्रॉड का खुलासा हुआ है।


प्रारंभिक जांच में सामने आया कि विजय कुमार यादव ने मेसर्स माया स्टील एंड एंटरप्राइज और मेसर्स मायरा स्टील एंटरप्राइजेज नाम से दो फर्मों का संचालन किया। आरोप है कि इन फर्मों के माध्यम से बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री किए लगभग 53 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की गई और उसके आधार पर 9.54 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) विभिन्न फर्मों को हस्तांतरित किया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन लेनदेन का उद्देश्य केवल कर लाभ हासिल करना था।


राज्य जीएसटी विभाग की विस्तृत जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने बंद और फर्जी फर्मों से प्राप्त इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर उसका उपयोग अपनी कर देनदारियों के भुगतान में किया। जांच के अनुसार आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों और कागजी लेनदेन के माध्यम से कर प्रणाली का दुरुपयोग करते हुए सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। विभाग के अनुसार, 10 ऐसी फर्मों से, जिनका जीएसटी पंजीकरण पहले ही निरस्त हो चुका था या जो आपस में संबंधित पक्ष थीं, बिना किसी वैध विलय (Merger), डी-मर्जर या अमलगमेशन के आईटीसी-02 फॉर्म के माध्यम से लगभग 6.13 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट स्थानांतरित कर उसका उपयोग किया गया।


इसके अलावा जांच में पाया गया कि पंजाब सहित अन्य राज्यों की नौ ऐसी फर्मों से भी इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया, जिनका जीएसटी पंजीकरण रद्द हो चुका था या जो वास्तविक रूप से अस्तित्व में नहीं थीं। इन फर्मों से किसी प्रकार की वास्तविक माल आपूर्ति नहीं हुई थी, फिर भी लगभग 1.99 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी दावा कर उसका लाभ उठाया गया। राज्य जीएसटी विभाग ने यह भी पाया कि बिना किसी वास्तविक खरीद के जीएसटीआर-2बी और जीएसटीआर-3बी के आंकड़ों में अंतर दिखाकर करीब 1.41 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट दावा किया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार यह पूरा लेनदेन केवल कागजी दस्तावेजों और फर्जी बिलों के आधार पर किया गया था।


जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने केवल अन्य फर्मों को ही फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध नहीं कराया, बल्कि स्वयं भी उसी राशि का लाभ लिया। बिना वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों के केवल बिलों के आधार पर खरीद-बिक्री दर्शाकर कर लाभ प्राप्त किया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा। राज्य जीएसटी विभाग का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। विभाग अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, फर्मों और संभावित लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस टैक्स फ्रॉड से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।