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16 मेट्रो स्टेशन बंद होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दोपहर तक समाधान के निर्देश l

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन के चलते सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन सहित राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया। इस फैसले का असर सुप्रीम कोर्ट आने वाले वकीलों, कर्मचारियों और मुकदमों से जुड़े पक्षकारों पर पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने अदालत का ध्यान इस समस्या की ओर दिलाया। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट कहा कि यदि दोपहर (लंच) तक प्रशासनिक स्तर पर कोई समाधान नहीं निकला, तो सुप्रीम कोर्ट स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करेगा। साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि मेट्रो स्टेशन बंद होने के कारण किसी वकील की अनुपस्थिति पर कोई प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए।

Kashish Rai24 जुल. 2026, 12:33 AM IST
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16 मेट्रो स्टेशन बंद होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दोपहर तक समाधान के निर्देश l

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के कारण दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इनमें सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन भी शामिल है। स्टेशन बंद होने से सुप्रीम कोर्ट आने वाले वकीलों, कर्मचारियों, मुकदमे से जुड़े पक्षकारों और आम यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने अदालत का ध्यान आकर्षित किया।


सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष कहा कि मेट्रो स्टेशन बंद होने के कारण बड़ी संख्या में अधिवक्ता समय पर अदालत नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन लोगों के पास सुप्रीम कोर्ट का वैध प्रवेश पास, प्रॉक्सिमिटी कार्ड या अन्य अधिकृत पहचान पत्र हैं, उन्हें सुरक्षा जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलने की अनुमति दी जाए। उनका कहना था कि इससे न्यायिक कार्य प्रभावित नहीं होगा और सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहेगी। वहीं, अन्य यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जा सकती है।


इस पर मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को पहले ही दिल्ली मेट्रो और संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुबह से ही इस संबंध में अधिकारियों के साथ संपर्क किया गया है और प्रशासनिक स्तर पर समाधान निकालने का प्रयास जारी है। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि दोपहर (लंच) तक कोई समाधान नहीं निकलता है, तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्वयं हस्तक्षेप करेगा और आवश्यक आदेश पारित करने पर विचार करेगा।


मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अदालत की कार्यवाही प्रभावित न हो, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की ओर से एक विशेष सर्कुलर जारी किया गया है। इस सर्कुलर में सभी पीठों को निर्देश दिया गया है कि यदि कोई अधिवक्ता मेट्रो स्टेशन बंद होने के कारण अदालत में उपस्थित नहीं हो पाता है, तो उसकी अनुपस्थिति के आधार पर किसी भी मामले में प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी पक्ष को केवल यातायात या सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए।


सुनवाई के दौरान विकास सिंह ने यह भी कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो इस मामले पर न्यायिक दृष्टिकोण से भी विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है और यहां प्रतिदिन हजारों वकील, कर्मचारी और आम नागरिक आते हैं। ऐसे में मेट्रो स्टेशन पूरी तरह बंद रहने से न्यायिक कार्य और आम लोगों की आवाजाही दोनों प्रभावित हो रहे हैं।


उधर, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का हवाला देते हुए 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखा है। इन स्टेशनों पर यात्रियों की एंट्री और एग्जिट दोनों पर रोक लगाई गई है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों और दिल्ली मेट्रो के बीच लगातार बातचीत जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोपहर तक कोई व्यावहारिक समाधान निकलता है या नहीं। यदि स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप कर सकता है। मामला न्यायिक व्यवस्था, आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।