crime

'हनीमून हत्याकांड' में सुप्रीम कोर्ट का चाबुक! गाजीपुर से शिलांग तक सनसनी, मुख्य आरोपी सोनम की जमानत रद्द

मेघालय के चेरापूंजी की वादियों में रची गई खौफनाक 'हनीमून हत्या साजिश' में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को तुरंत प्रभाव से रद्द करते हुए उसे दो से तीन सप्ताह के भीतर कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण (Surrender) करने का अल्टीमेटम दिया है। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने साफ किया कि ट्रायल के इस अहम मोड़ पर आरोपी का बाहर रहना निष्पक्ष न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

Sonali24 जुल. 2026, 12:34 AM IST
खबर शेयर करें:
'हनीमून हत्याकांड' में सुप्रीम कोर्ट का चाबुक! गाजीपुर से शिलांग तक सनसनी, मुख्य आरोपी सोनम की जमानत रद्द
मेघालय में हुए बहुचर्चित हनीमून हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत और मेघालय हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए आरोपी सोनम रघुवंशी को दो से तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण (Surrender) करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता और जारी गवाहियों को देखते हुए आरोपी का जेल से बाहर रहना निष्पक्ष सुनवाई को प्रभावित कर सकता है।

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि यदि आगामी छह महीनों के भीतर मामले में ट्रायल (न्यायिक सुनवाई) पूरा नहीं होता है, तो आरोपी महिला दोबारा जमानत के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र होगी। हालांकि, वर्तमान चरण में आरोपी को हिरासत में भेजा जाना आवश्यक है।

पूरा मामला और घटनाक्रम
यह मामला मई 2025 का है, जब इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी अपनी नवविवाहित पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे। यात्रा के दौरान राजा रघुवंशी अचानक लापता हो गए और एक हफ्ते बाद उनका शव सोहरा (चेरापूंजी) की एक गहरी खाई से बरामद हुआ। पुलिस जांच और पूरक आरोपपत्र में खुलासा हुआ कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य साथियों के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची थी। घटना के बाद आरोपी सोनम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के नंदगंज थाने में पुलिस के समक्ष पेश हुई थी, जहां से 9 जून 2025 को उसे गिरफ्तार किया गया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में थी।

हाईकोर्ट का फैसला और तकनीकी खामी का विवाद
सोनम रघुवंशी को शिलांग की ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल में जमानत दी थी, जिसे बाद में जून 2026 में मेघालय हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। जमानत देने का मुख्य आधार यह था कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मेमो में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या से जुड़ी धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) दर्ज हो गया था। हाईकोर्ट ने इसे संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन और पुलिस की लापरवाही माना था।
सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि यह केवल एक लिपिकीय या टाइपिंग की गलती (Typographical Error) थी, न कि गिरफ्तारी के आधार न बताने का मामला। उन्होंने कहा कि आरोपी को पहले से ही अपने खिलाफ लगे आरोपों और न्यायिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी थी।

सुप्रीम कोर्ट का रुख और टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्य सरकार की दलीलों से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के आधार पूरी तरह न देने (Non-service of grounds) और दिए गए कारणों में लिपिकीय त्रुटि होने के बीच स्पष्ट अंतर होता है। अदालत ने कहा कि केवल एक टाइपिंग की गलती के आधार पर इतने गंभीर हत्या के मामले में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती, खासकर जब पूर्व में दायर तीन जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं।
अदालत ने कहा कि मामले में प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और मुकदमे की प्रक्रिया जारी है, ऐसे में आरोपी की रिहाई से गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सोनम रघुवंशी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत के समक्ष सरेंडर करना होगा।