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कार में हत्या हुई तो नहीं मिलेगा एक्सीडेंट का मुआवजा! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, MACT के अधिकारों की तय की सीमा

क्या कार के अंदर हुई हर मौत को सड़क दुर्घटना माना जा सकता है? क्या हत्या के मामले में भी मोटर दुर्घटना मुआवजा मिल सकता है? इन अहम सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि यदि हत्या पूर्व नियोजित है और वाहन का इस्तेमाल केवल अपराध को अंजाम देने के लिए किया गया है, तो ऐसे मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के तहत मुआवजा नहीं मिलेगा। यह फैसला भविष्य में ऐसे सभी मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।

Sonali24 जुल. 2026, 12:34 AM IST
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कार में हत्या हुई तो नहीं मिलेगा एक्सीडेंट का मुआवजा! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, MACT के अधिकारों की तय की सीमा
22 जुलाई 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति संजय करोल (Justice Sanjay Karol) और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह (Justice Augustine George Masih) की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि केवल वाहन का उपयोग अपराध में होने भर से हर मृत्यु मोटर दुर्घटना नहीं बन जाती। वाहन के उपयोग और मृत्यु के बीच प्रत्यक्ष एवं निकट संबंध (Proximate Nexus) होना आवश्यक है।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला छत्तीसगढ़ में वर्ष 2009 की एक घटना से जुड़ा है। 29 नवंबर 2009 को आनंद नामक व्यक्ति अपने परिचित दिलीप अग्रवाल और एक अन्य व्यक्ति के साथ कार में गया था। इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा। तीन दिन बाद, 2 दिसंबर 2009 को उसका शव एक गांव के पास बरामद हुआ। पुलिस जांच में सामने आया कि यह मामला अपहरण और हत्या से जुड़ा था।
मृतक की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने दिलीप अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ अपहरण, हत्या और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को दोषी ठहराया, लेकिन बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष 'लास्ट सीन थ्योरी' सहित आवश्यक साक्ष्यों को पूरी तरह साबित नहीं कर सका।

हत्या के बाद मांगा गया मोटर दुर्घटना मुआवजा
आपराधिक मुकदमे से अलग मृतक की पत्नी और बच्चों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवजे की याचिका दाखिल की। उनका तर्क था कि आनंद की हत्या कार के भीतर हुई थी, इसलिए यह वाहन के उपयोग से जुड़ी घटना है और उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।
MACT ने इस दलील को स्वीकार करते हुए लगभग 5.64 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर लगभग 8.60 लाख रुपये कर दी। इसके बाद वाहन मालिक ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि मृतक की मृत्यु वाहन के उपयोग से हुई दुर्घटना का परिणाम थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वाहन केवल अपराध का स्थान या माध्यम था, जबकि हत्या पूरी तरह पूर्व नियोजित थी। पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को राहत देना है, न कि हर उस मामले में मुआवजा देना जिसमें किसी वाहन का किसी रूप में इस्तेमाल हुआ हो। यदि हत्या ही अपराध का मुख्य उद्देश्य हो और वाहन का उपयोग केवल उस अपराध को अंजाम देने के लिए किया गया हो, तो ऐसा मामला MACT के अधिकार क्षेत्र में नहीं आएगा।

'Accidental Murder' और 'Murder Simpliciter' में अंतर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक निर्णय Rita Devi बनाम New India Assurance Co. Ltd. का हवाला देते हुए कहा कि कानून "Accidental Murder" और "Murder Simpliciter" में स्पष्ट अंतर करता है।
अदालत ने कहा कि यदि किसी वाहन की चोरी या अन्य अपराध के दौरान हत्या अनपेक्षित रूप से हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे मोटर दुर्घटना से जोड़कर देखा जा सकता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति की सुनियोजित हत्या ही अपराध का मुख्य उद्देश्य हो और वाहन केवल अपराध का माध्यम बने, तो वह मोटर वाहन अधिनियम के तहत दुर्घटना नहीं मानी जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय भविष्य में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के समक्ष आने वाले अनेक मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। इससे स्पष्ट हो गया है कि केवल वाहन की मौजूदगी के आधार पर मुआवजा नहीं दिया जा सकता। दावा स्वीकार करने के लिए यह साबित करना होगा कि मृत्यु का सीधा संबंध वाहन के उपयोग से हुई दुर्घटना से था।