education
बढ़ई की बेटी से अंतरिक्ष मिशन तक: आंध्र प्रदेश की 14 वर्षीय कंडुला जेसी दुनिया के पहले ऑल-गर्ल्स लूनर मिशन में हुईं चयनित
आंध्र प्रदेश के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली 14 वर्षीय कंडुला जेसी, जिनके पिता बढ़ई (कारपेंटर) हैं, का चयन दुनिया के पहले ऑल-गर्ल्स ग्लोबल लूनर CubeSat मिशन 'Mission ShakthiSAT' के लिए हुआ है। 108 देशों की लगभग 12,000 छात्राओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद उन्हें भारत के 20 चयनित प्रतिभागियों में जगह मिली।
Kalpana Gautam24 जुल. 2026, 01:32 AM IST

गरीबी और सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बनते। इसका ताज़ा उदाहरण आंध्र प्रदेश की 14 वर्षीय छात्रा कंडुला जेसी हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। पूर्वी गोदावरी जिले के धवलेश्वरम स्थित जिला परिषद गर्ल्स हाई स्कूल (ZPGHS) में कक्षा 10 की छात्रा कंडुला जेसी के पिता एक बढ़ई हैं। साधारण परिवार से आने वाली जेसी ने असाधारण उपलब्धि हासिल करते हुए Mission ShakthiSAT में अपनी जगह बनाई है, जिसे दुनिया का पहला ऑल-गर्ल्स ग्लोबल लूनर CubeSat मिशन बताया जा रहा है।
12,000 प्रतिभागियों में चुनी गईं
इस मिशन के लिए दुनिया के 108 देशों से लगभग 12,000 छात्राओं ने आवेदन किया था। कठिन चयन प्रक्रिया के बाद भारत से केवल 20 छात्राओं का चयन किया गया, जिनमें कंडुला जेसी भी शामिल हैं। वह आंध्र प्रदेश से चयनित होने वाली प्रमुख छात्राओं में से एक हैं।
550 से अधिक प्रशिक्षण सत्र किए पूरे
रिपोर्ट्स के अनुसार, जेसी ने सैटेलाइट सिस्टम, थर्मोडायनामिक्स, प्रोपल्शन और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उन्नत विषयों पर करीब 550 ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र पूरे किए। शुरुआत में उन्हें विषय कठिन लगे, लेकिन उन्होंने एक भी क्लास नहीं छोड़ी और लगातार मेहनत जारी रखी।
वैज्ञानिकों के साथ करेंगी काम
23 अगस्त से नई दिल्ली में चयनित छात्राओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान वे वैज्ञानिकों के साथ मिलकर सैटेलाइट डिज़ाइन, पेलोड डेवलपमेंट और मिशन ऑपरेशन पर काम करेंगी। प्रस्तावित CubeSat को 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च करने की योजना है।
ISRO में काम करने का सपना
कंडुला जेसी का सपना भविष्य में ISRO में वैज्ञानिक बनकर भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान देना है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
