health
अब खून की एक साधारण जांच बताएगी अल्ज़ाइमर (Alzheimer) का खतरा! लक्षण दिखने से 10–20 साल पहले मिल सकता है बड़ा संकेत
अल्ज़ाइमर रोग की जल्द पहचान की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। हालिया शोध के अनुसार, रक्त में मौजूद p-tau217 नामक बायोमार्कर की जांच से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति में भविष्य में अल्ज़ाइमर के लक्षण विकसित होने का जोखिम कितना है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह जांच अभी नियमित स्क्रीनिंग के लिए नहीं है और इस पर आगे और अध्ययन की आवश्यकता है।
Kalpana Gautam24 जुल. 2026, 01:32 AM IST

अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer's Disease) की पहचान और रोकथाम के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नए शोधों से पता चला है कि एक साधारण ब्लड टेस्ट भविष्य में अल्ज़ाइमर होने के खतरे का अनुमान लक्षण दिखाई देने से कई वर्ष पहले लगा सकता है। यह परीक्षण रक्त में मौजूद Phosphorylated Tau-217 (p-tau217) नामक प्रोटीन के स्तर को मापता है। यह प्रोटीन मस्तिष्क में बनने वाले अमाइलॉइड प्लाक और टाउ प्रोटीन से जुड़ा होता है, जिन्हें अल्ज़ाइमर रोग की प्रमुख पहचान माना जाता है।
क्या कहती है रिसर्च?
हाल ही में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में हजारों ऐसे बुजुर्गों को शामिल किया गया जिनमें शुरुआत में कोई याददाश्त संबंधी समस्या नहीं थी।
शोध के अनुसार:
जिन लोगों में p-tau217 का स्तर बहुत अधिक था, उनमें अगले 5 वर्षों में संज्ञानात्मक कमजोरी (Cognitive Impairment) विकसित होने का जोखिम लगभग 38% पाया गया।
वहीं 10 वर्षों के भीतर यह जोखिम लगभग 78% तक पहुंच गया।
एक अन्य NIH समर्थित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने "Alzheimer's Clock" विकसित किया, जो रक्त परीक्षण के आधार पर यह अनुमान लगाने की कोशिश करता है कि किसी व्यक्ति में अल्ज़ाइमर के लक्षण किस आयु के आसपास शुरू हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि 60 वर्ष की आयु में p-tau217 का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है, तो औसतन लगभग 20 वर्ष बाद लक्षण विकसित हो सकते हैं, जबकि 80 वर्ष की आयु में यह अंतर लगभग 11 वर्ष रह सकता है।
क्या यह टेस्ट अभी सभी के लिए उपलब्ध है?
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह तकनीक अभी अनुसंधान और जोखिम आकलन (Risk Assessment) के चरण में है। इसे फिलहाल स्वस्थ लोगों के लिए नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जा रही है।
इसका सबसे बड़ा उपयोग भविष्य में उन लोगों की पहचान करना हो सकता है जिन्हें अल्ज़ाइमर होने का अधिक खतरा है, ताकि उन्हें नई दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल या शुरुआती उपचार रणनीतियों में शामिल किया जा सके
क्यों है यह खोज महत्वपूर्ण?
अल्ज़ाइमर एक ऐसी बीमारी है जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होती हैं और याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता तथा दैनिक कार्य प्रभावित होने लगते हैं। अधिकांश मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब मस्तिष्क को काफी नुकसान हो चुका होता है।
यदि भविष्य में इस प्रकार का ब्लड टेस्ट व्यापक रूप से सफल साबित होता है, तो डॉक्टर बीमारी की पहचान बहुत पहले कर सकेंगे और समय रहते उपचार या जीवनशैली में बदलाव के जरिए रोग की गति को धीमा करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि इस दिशा में अभी और शोध तथा दीर्घकालिक परीक्षण आवश्यक हैं।
