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'एनर्जी ड्रिंक' के दावों पर FSSAI का बड़ा एक्शन: क्या सच में मिलती है ऊर्जा या सिर्फ कैफीन और चीनी का असर?
देश की खाद्य सुरक्षा नियामक संस्था FSSAI ने कई प्रमुख पेय कंपनियों को नोटिस जारी कर 'Energy Drink' और "Boosts Energy", "Enhances Focus", "Vitalizes Body and Mind" जैसे दावों पर सवाल उठाए हैं। FSSAI का कहना है कि भारत में "Energy Drink" के लिए कोई अलग अधिसूचित मानक नहीं है और बिना वैज्ञानिक एवं कानूनी आधार के ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दावे करना भ्रामक हो सकता है।
Kalpana Gautam24 जुल. 2026, 11:02 AM IST

नई दिल्ल, देश में लोकप्रिय एनर्जी ड्रिंक्स अब नियामक जांच के घेरे में हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने रेड बुल, मॉन्स्टर, स्टिंग, कैंपा एनर्जी, एड्रेनालिन रश और हेल एनर्जी समेत छह प्रमुख ब्रांडों को नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इन उत्पादों को "Energy Drink" के रूप में प्रचारित किया जा रहा है और इनके विज्ञापनों में ऐसे दावे किए जा रहे हैं जो भारतीय खाद्य कानूनों के अनुरूप नहीं हैं।
FSSAI ने क्या कहा?
FSSAI के अनुसार भारत में "Energy Drink" नाम की कोई अलग अधिसूचित खाद्य श्रेणी (Standard) मौजूद नहीं है। इसलिए किसी उत्पाद को इसी नाम से प्रस्तुत करना या "ऊर्जा बढ़ाने", "फोकस बढ़ाने", "शरीर और दिमाग को सक्रिय करने" तथा "कमजोरी दूर करने" जैसे कार्यात्मक (Functional) या चिकित्सीय (Therapeutic) दावे करना नियमों के विरुद्ध हो सकता है।
क्या वास्तव में ये ड्रिंक्स ऊर्जा देती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश तथाकथित एनर्जी ड्रिंक्स का प्रभाव मुख्य रूप से कैफीन और अधिक मात्रा में चीनी (Sugar) के कारण होता है।
कैफीन कुछ समय के लिए नींद और थकान का एहसास कम करता है।
चीनी शरीर में तुरंत ग्लूकोज़ बढ़ाकर थोड़ी देर के लिए ऊर्जा जैसा अनुभव कराती है।
लेकिन कुछ समय बाद "Sugar Crash" के कारण व्यक्ति फिर से थकान महसूस कर सकता है।
यानी ये पेय शरीर में वास्तविक या स्थायी ऊर्जा उत्पन्न नहीं करते, बल्कि अस्थायी उत्तेजना (Stimulation) प्रदान करते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक मात्रा में इन पेयों का सेवन करने से कई स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं, जिनमें शामिल हैं—
- तेज धड़कन (Palpitations)
- उच्च रक्तचाप
- बेचैनी और घबराहट
- नींद की समस्या
- निर्जलीकरण (Dehydration)
- अधिक चीनी के कारण मोटापा और मधुमेह का खतरा
- बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और हृदय रोगियों को ऐसे पेयों के सेवन में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
FSSAI ने ऐसे प्रचारात्मक दावों पर आपत्ति जताई है और स्पष्ट किया है कि भारत में "Energy Drink" के लिए कोई अलग मानक अधिसूचित नहीं है। इन पेयों का प्रभाव मुख्यतः कैफीन और चीनी से मिलने वाली अस्थायी उत्तेजना के कारण होता है, न कि किसी सिद्ध चिकित्सीय लाभ के कारण।
निष्कर्ष
FSSAI की कार्रवाई उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी पेय के स्वास्थ्य संबंधी दावों पर भरोसा करने से पहले उसके लेबल, पोषण संबंधी जानकारी और वैज्ञानिक प्रमाणों को अवश्य देखें।
