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देहरादून में नर्सों का प्रदर्शन बना बड़ा मुद्दा, भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर सरकार पर बढ़ा दबाव।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लंबे समय से सरकारी भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन कर रही बेरोजगार नर्सों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को उस समय बेहद गंभीर और भावुक मोड़ पर पहुंच गया, जब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन कर रही चार महिला नर्सिंग अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर फिनाइल पी लिया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल सभी को अस्पताल पहुंचाया, जहां एक महिला अभ्यर्थी की हालत गंभीर होने के कारण उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा, जबकि अन्य तीन का भी इलाज जारी है।

यह घटना उत्तराखंड में लंबे समय से लंबित नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया और बेरोजगार युवाओं में बढ़ती निराशा को उजागर करती है। प्रदर्शनकारी पिछले कई महीनों से लगातार सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण उनका आंदोलन अब उग्र रूप लेता दिखाई दे रहा है।
आठ महीने से जारी है आंदोलन
'नर्सिंग एकता मंच' के बैनर तले सैकड़ों प्रशिक्षित नर्सिंग अभ्यर्थी पिछले करीब आठ महीने से राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी सेवा में जाने का सपना देखा था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया वर्षों से अटकी हुई है। लगातार इंतजार के कारण हजारों प्रशिक्षित नर्सें बेरोजगार हैं, जबकि दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की कमी बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को बार-बार टाल रही है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। उनका कहना है कि लंबे इंतजार के कारण कई उम्मीदवार अधिकतम आयु सीमा के करीब पहुंच चुके हैं या उसे पार कर चुके हैं।
मंत्री से वार्ता भी नहीं लाई समाधान
प्रदर्शन से एक दिन पहले नर्सिंग अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं। अभ्यर्थियों का कहना है कि बैठक में उन्हें कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला और न ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए कोई समयसीमा बताई गई। बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलन और तेज हो गया। इसी दौरान प्रदर्शन के बीच चार महिला अभ्यर्थियों ने कथित रूप से फिनाइल पी लिया। घटना के बाद मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर सभी को अस्पताल पहुंचाया।
क्या हैं नर्सिंग अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है कि वर्ष 2020 से पहले राज्य में वर्षवार वरिष्ठता के आधार पर भर्ती की व्यवस्था थी। बाद में सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करते हुए लिखित परीक्षा को अनिवार्य कर दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इससे लंबे समय से इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है। उनकी प्रमुख मांगों में वर्षवार वरिष्ठता के आधार पर नियुक्तियां, प्रस्तावित लिखित परीक्षा को निरस्त करना, अधिकतम आयु सीमा में छूट देना, उत्तराखंड के स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देना तथा भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुसार कम से कम 2,000 नए नर्सिंग पदों का सृजन शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य के कई सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। यदि रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की जाए तो इससे स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार होगा और बेरोजगार नर्सों को रोजगार भी मिलेगा।
सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी भी बना मुद्दा
नर्सिंग अभ्यर्थियों का दावा है कि राज्य के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध नहीं है। कई अस्पतालों में एक नर्स को एक साथ कई वार्डों की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। उनका कहना है कि सरकार एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से रिक्त पड़े पदों को भरने में देरी कर रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता बेहद आवश्यक है। नर्सें मरीजों की देखभाल, आपातकालीन सेवाओं, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
घटना के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर बेरोजगार युवाओं की अनदेखी का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि यदि समय रहते भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने सरकार से तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और घायल अभ्यर्थियों के बेहतर इलाज की व्यवस्था करने की मांग की है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भर्ती परीक्षाओं में देरी और कथित पेपर लीक जैसे मामलों के कारण युवाओं का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। ऐसे में सरकार को पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।
सरकार की प्रतिक्रिया
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और सभी पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है। प्रशासन ने घटना की जानकारी मिलने के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। वहीं पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।
आगे की राह
देहरादून की यह घटना केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि लंबे समय से रोजगार का इंतजार कर रहे हजारों प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निराशा और असंतोष का प्रतीक बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने, रिक्त पदों का पारदर्शी तरीके से भरने और प्रदर्शनकारियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
