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HPV टीकाकरण नीति पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

देश में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनकी नीति, तैयारियों और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।

Vindhya Dubey24 जुल. 2026, 09:03 PM IST
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HPV टीकाकरण नीति पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह केवल एक वैक्सीन से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि लाखों किशोरियों और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण सार्वजनिक हित का मामला है। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि HPV वैक्सीन को यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) में शामिल करने के संबंध में अब तक क्या निर्णय लिए गए हैं और यदि इसे अभी तक राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनाया गया है तो इसके पीछे क्या कारण हैं।

क्या है पूरा मामला?

याचिका में कहा गया है कि भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में शामिल है और हर वर्ष हजारों महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु हो जाती है। चिकित्सा अनुसंधान के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के पीछे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण जिम्मेदार होता है। ऐसे में किशोरियों को समय पर HPV वैक्सीन देने से भविष्य में इस कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वर्तमान में HPV वैक्सीन निजी अस्पतालों और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से उपलब्ध है, लेकिन इसकी कीमत अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की अधिकांश बच्चियां इससे वंचित रह जाती हैं। यदि इसे सरकार के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाता है तो देशभर में समान रूप से इसकी पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।

हाईकोर्ट ने किन मुद्दों पर मांगा जवाब?

  • HPV वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने पर सरकार की वर्तमान नीति।
  • इस संबंध में राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) या अन्य विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशें।
  • वैक्सीन की उपलब्धता, लागत और खरीद की स्थिति।
  • देशभर में इसे लागू करने की व्यवहारिक योजना।
  • अब तक लिए गए प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय।
  • यदि इसे अभी तक शामिल नहीं किया गया है तो उसके कारण।

अदालत ने केंद्र सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सर्वाइकल कैंसर का बोझ काफी अधिक है। यह महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद सबसे सामान्य कैंसरों में गिना जाता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में नए मामले सामने आते हैं और देर से पहचान होने के कारण मृत्यु दर भी चिंता का विषय बनी रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर उन कुछ कैंसरों में शामिल है जिनकी प्रभावी रोकथाम संभव है। HPV संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण और समय-समय पर स्क्रीनिंग कराने से अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।

HPV वैक्सीन कैसे करती है बचाव?

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस एक सामान्य वायरल संक्रमण है, जिसके कई प्रकार होते हैं। इनमें HPV-16 और HPV-18 सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। HPV वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को इन वायरस प्रकारों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है और संक्रमण के जोखिम को काफी कम कर देती है।

चिकित्सकों के अनुसार यह वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी तब होती है जब इसे किशोरावस्था में, यौन सक्रियता शुरू होने से पहले लगाया जाए। इसी कारण विश्वभर में इसे 9 से 14 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए प्राथमिकता के साथ देने की सिफारिश की जाती है। कई देशों में लड़कों को भी यह वैक्सीन दी जा रही है ताकि HPV संक्रमण के प्रसार को कम किया जा सके।

भारत में क्या है वर्तमान स्थिति?

भारत में HPV वैक्सीन को नियामकीय मंजूरी प्राप्त है और निजी क्षेत्र में कई वर्षों से उपलब्ध है। इसके अलावा देश में विकसित स्वदेशी HPV वैक्सीन भी बाजार में उपलब्ध हो चुकी है। हालांकि अभी तक इसे पूरे देश के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा नहीं बनाया गया है।

कुछ राज्यों ने सीमित स्तर पर स्कूल आधारित या राज्य सरकार की विशेष योजनाओं के माध्यम से HPV टीकाकरण अभियान शुरू किए हैं, लेकिन पूरे देश में एक समान व्यवस्था अभी लागू नहीं है।

WHO की क्या सिफारिश है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन की वैश्विक रणनीति के तहत अधिक से अधिक किशोरियों को HPV वैक्सीन देने पर जोर दिया है। WHO का लक्ष्य है कि 15 वर्ष की आयु तक कम से कम 90 प्रतिशत लड़कियों का HPV टीकाकरण किया जाए। इसके साथ नियमित स्क्रीनिंग और समय पर उपचार को भी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

आगे क्या होगा?

अब केंद्र सरकार को अदालत के समक्ष अपना विस्तृत पक्ष रखना होगा। सरकार के जवाब के आधार पर हाईकोर्ट यह तय करेगा कि इस मामले में आगे क्या निर्देश दिए जाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में HPV वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाता है तो इससे देश में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को नई गति मिल सकती है और लाखों किशोरियों को दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी।