crime

संभल हिंसा: मोहम्मद वारिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई l

संभल हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी मोहम्मद वारिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत कार्रवाई की है। इससे पहले इसी मामले में दो अन्य आरोपियों पर भी एनएसए लगाया जा चुका है। सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश की जानी है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

Kashish Rai24 जुल. 2026, 09:03 PM IST
खबर शेयर करें:
संभल हिंसा: मोहम्मद वारिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई l

उत्तर प्रदेश के चर्चित संभल हिंसा मामले में सरकार ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी मोहम्मद वारिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA/रासुका) लगा दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वारिस को हिंसा के प्रमुख आरोपियों में शामिल माना गया है। इसी आधार पर प्रशासन ने उसके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की है। इस फैसले के बाद संभल हिंसा मामले में एनएसए के तहत कार्रवाई झेलने वाले प्रमुख आरोपियों की संख्या तीन हो गई है।


इससे पहले इसी मामले में मुल्ला अफरोज और मोहम्मद गुलाम पर भी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगाया जा चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा फैलाने के आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों की भूमिका हिंसा में सामने आई है, उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।


सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब संभल हिंसा की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट में हिंसा की पूरी पृष्ठभूमि, घटनाक्रम, जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य, जिम्मेदार लोगों की भूमिका और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य शामिल होंगे। रिपोर्ट के सदन में पेश होने के बाद इस मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।


गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। यह सर्वे अदालत के आदेश पर उस याचिका के आधार पर किया जा रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि जिस स्थान पर वर्तमान में शाही जामा मस्जिद स्थित है, वहां पहले हरिहर मंदिर था। सर्वे के विरोध में बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए और देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया।


हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव, आगजनी और झड़पें हुईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस हिंसा में कई लोगों की मौत हुई, जबकि सुरक्षाकर्मियों सहित कई अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी थीं और स्कूलों में भी छुट्टी घोषित कर दी गई थी। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में लाया गया था।


फिलहाल, पुलिस और एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होने वाली एसआईटी रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे हिंसा के पूरे घटनाक्रम और जांच के निष्कर्षों की विस्तृत तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।